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Hamirpur (Himachal) News: 10 हजार फीट ऊंचाई पर हुम उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
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सराज घाटी के देव कांढा में हुम उत्सव में उमड़ी भीड़। स्त्रोत्- जागरूक पाठक
बालीचौकी (मंडी)। सराज घाटी में समुद्र तल से करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देव कांढा में वीरवार को आराध्य देवता मतलोड़ा बिष्णु का प्रसिद्ध हुम उत्सव पारंपरिक देव रस्मों और श्रद्धा के साथ संपन्न हो गया। उत्सव में मंडी, कुल्लू सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। देवता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की भीड़ जुटी रही।
उत्सव की शुरुआत बीते बुधवार शाम बागाचनोगी की चोहट कोठी में देवता मतलोड़ा बिष्णु के सुशोभित होने की प्रक्रिया के साथ हुई। इस दौरान सात हार के कारकून भी मौजूद रहे। इसके बाद वीरवार तड़के करीब चार बजे देवता अपने देवलुओं और पारंपरिक लाव-लश्कर के साथ मूल स्थान देव कांढा के लिए रवाना हुए। देवता की भव्य जलेब में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। देवरथ के मंदिर पहुंचने पर पूरा क्षेत्र देव आस्था से सराबोर हो गया।
मंदिर परिसर में देवता की परिक्रमा के बाद पारंपरिक देव रस्में निभाई गईं। इस दौरान कई महिला और पुरुष श्रद्धालुओं में देव प्रभाव के दृश्य भी देखने को मिले। श्रद्धालुओं ने देवता के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
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हुम उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाए। मान्यता है कि देवता के समक्ष सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर कई परिवार बच्चों का मुंडन करवाने के लिए देव कांढा पहुंचे।
देवता कमेटी सात हार के कारदार बीरबल ने बताया कि इस बार उत्सव में विशेष रूप से गो पूजा की गई। साथ ही क्षेत्र की सुरक्षा और खुशहाली के लिए देवता से ‘बांडबंदी’ यानी सुरक्षा कवच प्रदान करने का आग्रह किया गया। उत्सव ने सराज घाटी की समृद्ध देव परंपरा और लोक संस्कृति की झलक पेश की।
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उत्सव की शुरुआत बीते बुधवार शाम बागाचनोगी की चोहट कोठी में देवता मतलोड़ा बिष्णु के सुशोभित होने की प्रक्रिया के साथ हुई। इस दौरान सात हार के कारकून भी मौजूद रहे। इसके बाद वीरवार तड़के करीब चार बजे देवता अपने देवलुओं और पारंपरिक लाव-लश्कर के साथ मूल स्थान देव कांढा के लिए रवाना हुए। देवता की भव्य जलेब में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। देवरथ के मंदिर पहुंचने पर पूरा क्षेत्र देव आस्था से सराबोर हो गया।
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मंदिर परिसर में देवता की परिक्रमा के बाद पारंपरिक देव रस्में निभाई गईं। इस दौरान कई महिला और पुरुष श्रद्धालुओं में देव प्रभाव के दृश्य भी देखने को मिले। श्रद्धालुओं ने देवता के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
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हुम उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाए। मान्यता है कि देवता के समक्ष सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर कई परिवार बच्चों का मुंडन करवाने के लिए देव कांढा पहुंचे।
देवता कमेटी सात हार के कारदार बीरबल ने बताया कि इस बार उत्सव में विशेष रूप से गो पूजा की गई। साथ ही क्षेत्र की सुरक्षा और खुशहाली के लिए देवता से ‘बांडबंदी’ यानी सुरक्षा कवच प्रदान करने का आग्रह किया गया। उत्सव ने सराज घाटी की समृद्ध देव परंपरा और लोक संस्कृति की झलक पेश की।