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Hamirpur (Himachal) News: बलोखर में दो मुंह और आठ टांग वाले कटड़े ने लिया जन्म
Mon, 01 Sep 2025 12:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 01 Sep 2025 12:45 AM IST
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जाहू (हमीरपुर)। पंचायत नंधन के बलोखर गांव में एक भैंस ने दो मुंह और आठ टांग वाले मरे हुए कटड़े को जन्म दिया। अनोखी घटना होने के कारण इसकी क्षेत्र में काफी चर्चा है।
पशुपालक विक्रम कुमार ने बताया कि भैंस का स्वास्थ्य थोड़ा ढीला हुआ तो पशु चिकित्सालय पट्टा के कर्मचारियों को सूचित किया गया। पशुपालन विभाग की टीम में डॉ. अशोक रांगड़ा पट्टा, डॉ. पंकज शर्मा डेरापरोल, फार्मासिस्ट बालकृष्ण पट्टा और मनीष कुमार डेरापरोल ने स्थिति सामान्य न होने और भैंस को सुरक्षित बचाने के लिए उसका ऑपरेशन करने का निर्णय किया।
डेढ़ घंटे के बाद भैंस के गर्भ से दो मुंह व आठ टांगों वाले कटड़े को बाहर निकाला गया। कटड़ा भैंस के गर्भ में ही मर चुका था। पशुपालक विक्रम कुमार ने भैंस को सुरक्षित बचाने के लिए पशुपालन विभाग की टीम का आभार प्रकट किया है। भोरंज के उपमंडल चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि भैंस के गर्भ में निर्मित दो कटड़ों के विभिन्न शरीर हैं, जो कि एक समय बाद आपस में जुड़ गए हैं। ऐसी स्थिति को मेडिकल टर्म में आपस में जुड़ाव के नाम से जाना जाता है। सामान्यतः इस प्रकार के बहुत कम मामले देखने को मिलते हैं।
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पशुपालक विक्रम कुमार ने बताया कि भैंस का स्वास्थ्य थोड़ा ढीला हुआ तो पशु चिकित्सालय पट्टा के कर्मचारियों को सूचित किया गया। पशुपालन विभाग की टीम में डॉ. अशोक रांगड़ा पट्टा, डॉ. पंकज शर्मा डेरापरोल, फार्मासिस्ट बालकृष्ण पट्टा और मनीष कुमार डेरापरोल ने स्थिति सामान्य न होने और भैंस को सुरक्षित बचाने के लिए उसका ऑपरेशन करने का निर्णय किया।
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डेढ़ घंटे के बाद भैंस के गर्भ से दो मुंह व आठ टांगों वाले कटड़े को बाहर निकाला गया। कटड़ा भैंस के गर्भ में ही मर चुका था। पशुपालक विक्रम कुमार ने भैंस को सुरक्षित बचाने के लिए पशुपालन विभाग की टीम का आभार प्रकट किया है। भोरंज के उपमंडल चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि भैंस के गर्भ में निर्मित दो कटड़ों के विभिन्न शरीर हैं, जो कि एक समय बाद आपस में जुड़ गए हैं। ऐसी स्थिति को मेडिकल टर्म में आपस में जुड़ाव के नाम से जाना जाता है। सामान्यतः इस प्रकार के बहुत कम मामले देखने को मिलते हैं।
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