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दादा की प्रतिमा की हालत देख पोता आहत
Hamirpur
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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नादौन (हमीरपुर)। बीकानेर से नादौन पहुंचे समीर उपाध्याय ने अपनी जन्मभूमि पर ही क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी दादा पंडित इंद्रपाल की प्रतिमा की दुर्दशा को देख स्थानीय प्रशासन को कोसा। पत्रकार वार्ता में समीर उपाध्याय ने कहा कि प्रशासन स्वतंत्रता सेनानियों की यादों को संजोए रखने में नाकाम साबित हो रहा है, उसका उदाहरण दादा की प्रतिमा है। करीब तीन माह पहले स्वतंत्रता दिवस पर उनके दादा की प्रतिमा पर अर्पित की गई फूल मालाओं को किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने उतारकर जल प्रवाह नहीं किया है। दशकों तक प्रशासन के पास मांग को उठाने के बाद दादा पंडित इंद्रपाल की प्रतिमा पर सरकार की ओर से छत्री बनाई गई थी। लेकिन आज देखभाल की कमी के चलते स्थल की स्थिति बद से बदतर बन चुकी है।
उपाध्याय ने कहा कि प्रतिमा के ऊपर पड़ी धूल और जाल प्रशासन की नाकामी दिखाने के लिए काफी हैं। इससे उनकी आत्मा आहत हुई है। उनका परिवार परिस्थितियों के चलते बीकानेर राजस्थान में रहता है और दादा की जन्मभूमि नादौन में प्राय: आना जाना होता है। प्रशासन से प्रशभन पूछते हुए कहा कि यदि इस स्थल पर भारत के किसी अन्य बड़े नेता की प्रतिमा होती तो भी क्या प्रशासन यही रुख अपनाता। समीर ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में सरदार भगत सिंह के साथ दायां हाथ रहे पंडित इंद्र्रपाल ने अपनी जवानी के स्वर्णिम क्षण देश के लिए अर्पित कर दिए थे। उन्होंने जिलाधीश, स्थानीय प्रशासन से मांग की कि वह प्रतिमा का उचित रखरखाव करने के लिए कदम उठाए।
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उपाध्याय ने कहा कि प्रतिमा के ऊपर पड़ी धूल और जाल प्रशासन की नाकामी दिखाने के लिए काफी हैं। इससे उनकी आत्मा आहत हुई है। उनका परिवार परिस्थितियों के चलते बीकानेर राजस्थान में रहता है और दादा की जन्मभूमि नादौन में प्राय: आना जाना होता है। प्रशासन से प्रशभन पूछते हुए कहा कि यदि इस स्थल पर भारत के किसी अन्य बड़े नेता की प्रतिमा होती तो भी क्या प्रशासन यही रुख अपनाता। समीर ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में सरदार भगत सिंह के साथ दायां हाथ रहे पंडित इंद्र्रपाल ने अपनी जवानी के स्वर्णिम क्षण देश के लिए अर्पित कर दिए थे। उन्होंने जिलाधीश, स्थानीय प्रशासन से मांग की कि वह प्रतिमा का उचित रखरखाव करने के लिए कदम उठाए।
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