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प्रधानाचार्यों की बिना किसी वितीय लाभ से की गई प्लेसमेंट पर जताया रोष
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:54 PM IST
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हमीरपुर। हिमाचल शिक्षक मंच ने प्रधानाचार्यों की बिना किसी वित्तीय लाभ के प्लेसमेंट पर रोष प्रकट किया है। मंच के प्रदेश संयोजक सदस्य अश्वनी भट्ट, संजय मोगू, संजीव राणा, सुनील राजपूत, तपिश थापा, विजय शमशेर भंडारी ने कहा कि प्रदेश में पूर्व सरकार के समय में जो गलत तरीके से नियमित नियुक्तियों के स्थान पर प्लेसमेंट देने की परंपरा चलाई गई थी, इसे वर्तमान समय में जारी रखा गया है। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व सैनिकों की वरिष्ठता को असंवैधानिक करार देते हुए पदोन्नतियों पर लगी रोक को हटा दिया है। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 2008 से 2011 तक के आठ सौ के लगभग प्रधानाचार्यों की नियुक्तियों को नियमित भी किया है लेकिन, इसके बाद इस कार्य पर विराम लगा दिया है।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रधानाचार्यों को उम्मीद थी कि 2018 तक के सभी प्रधानाचार्यों की पदोन्नतियों को नियमित करने के साथ अब आगे से कोई भी नियुक्ति या पदोन्नति प्लेसमेंट के आधार पर नहीं होगी। फिर से बिना किसी वित्तीय लाभ के प्रदेश के शिक्षकों को केवल प्रधानाचार्य के पदों का प्रभार देने से निराशा हुई है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव भी इस विषय पर कह चुके हैं कि प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां नियमित ही होंगी लेकिन, फिर से प्लेसमेंट सूची जारी करके केवल प्रधानाचार्य के पद का प्रभार देना सही नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि पहले से लगे प्रधानाचार्यों को तुरंत नियमित किया जाए। मंच का एक प्रतिनिधिमंडल इस विषय पर शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंप कर नियमित पदोन्नतियों की मांग करेगा।
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मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रधानाचार्यों को उम्मीद थी कि 2018 तक के सभी प्रधानाचार्यों की पदोन्नतियों को नियमित करने के साथ अब आगे से कोई भी नियुक्ति या पदोन्नति प्लेसमेंट के आधार पर नहीं होगी। फिर से बिना किसी वित्तीय लाभ के प्रदेश के शिक्षकों को केवल प्रधानाचार्य के पदों का प्रभार देने से निराशा हुई है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव भी इस विषय पर कह चुके हैं कि प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां नियमित ही होंगी लेकिन, फिर से प्लेसमेंट सूची जारी करके केवल प्रधानाचार्य के पद का प्रभार देना सही नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि पहले से लगे प्रधानाचार्यों को तुरंत नियमित किया जाए। मंच का एक प्रतिनिधिमंडल इस विषय पर शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंप कर नियमित पदोन्नतियों की मांग करेगा।
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