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Hamirpur (Himachal) News: चार पीढ़ियों से बांस की कला को संजोकर रखे हैं 62 वर्षीय पूर्ण चंद

Fri, 18 Sep 2026 12:24 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Fri, 18 Sep 2026 12:24 AM IST
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62-year-old Puran Chand has been preserving the art of bamboo craft for four generations.
सुजानपुर निवासी 62 वर्षीय पूर्ण चंद घर पर बांस की कलाकृतियां बनाते हुए। संवाद
बवीता चंदेल
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हमीरपुर। बदलते दौर में मशीनों और प्लास्टिक के सामान ने पारंपरिक हस्तकला के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। इसके बावजूद सुजानपुर निवासी 62 वर्षीय पूर्ण चंद चार पीढ़ियों से चली आ रही बांस की कलाकारी को अपने हाथों से जीवित रखे हुए हैं।
उन्होंने सात वर्ष की उम्र में परिवार के साथ यह हुनर सीखा था। आज भी वह बांस की खपच्चियों से टोकरियां और अन्य सामान तैयार कर रहे हैं। पूर्ण चंद ने बताया कि यह कला उन्हें दादा-परदादा से विरासत में मिली है।
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बचपन में परिवार के सदस्यों को बांस से सामान तैयार करते देखकर उन्होंने भी काम सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे बांस काटने, छीलने और उसकी पतली खपच्चियां तैयार करने में दक्षता हासिल की। इन्हीं खपच्चियों से टोकरी और अन्य सामान तैयार किए जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि पहले छोटी टोकरी एक रुपये और बड़ी पांच से छह रुपये में बिकती थी। अब मांग कम होने के बावजूद छोटी टोकरी 100 और बड़ी 300 रुपये में बिक रही है। एक टोकरी तैयार करने में पूरा दिन लग जाता है।
बांस को काटने के बाद उसकी पतली खपच्चियां तैयार कर उन्हें आपस में पिरोकर टोकरी का आकार दिया जाता है। पूर्ण चंद के अनुसार पहले गांवों में बांस से बने सामान की काफी मांग थी, लेकिन प्लास्टिक और मशीन से तैयार वस्तुओं की आसानी से उपलब्धता के कारण अब इनकी मांग घट गई है।

पूरा दिन मेहनत करने के बावजूद उचित मेहनताना नहीं मिल पाता, जिससे नई पीढ़ी इस काम को अपनाने में रुचि नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि कारीगरों को उचित मेहनताना और उत्पादों के लिए बाजार मिले तो इस पारंपरिक कला को बचाया जा सकता है।
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