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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करवाया जाए : संघ
Updated Sat, 13 Oct 2018 10:57 PM IST
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर के समीरपुर में वर्ष 2003 से पूर्व नियुक्त अनुबंध अध्यापक संघ के राज्य संयोजक चंद्र मोहन की अगुवाई में संघ के सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करवाने के लिए सांसद अनुराग ठाकुर से मिला। उनके साथ जिला संयोजक मोहन शर्मा, दिनेश कुमार, विनोद चौहान, लक्की शर्मा रविकांत, देशराज, बामदेव, मनोहर, किशोर कुमार, दिनेश्वर, योगेश, सुदर्शन, योगराज, राजेंद्र कुमार, राज कुमार तथा अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। उन्होंने सांसद अनुराग ठाकुर के माध्यम से राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि 2003 से पूर्व नियुक्त अनुबंध अध्यापकों के पक्ष में आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को जल्द से जल्द लागू किया जाए।
चंद्रमोहन ने बताया कि लगभग 3500 अध्यापक (जेबीटी, सीएंडवी, टीजीटी और प्रवक्ता 15 मई 2003 से पूर्व) नियमों के तहत अनुबंध आधार पर सरकार की ओर से नियुक्त किए गए थे। जिन्हें 8, 10 या 11 साल के लंबे अनुबंध कार्यकाल के बाद नियमित किया गया था। इसी संदर्भ में जोगा सिंह बनाम राज्य सरकार सीडब्ल्यूपी 8953/2013 और पूनम कुमारी बनाम राज्य सरकार सीडब्ल्यूपी 520, 2015 तथा नरेंद्र सिंह नायक बनाम राज्य सरकार केस संख्या 6785, 2008) सुप्रीम कोर्ट से फैसला 2015 में आ गया था। लेकिन, 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी उपरोक्त फैसले को पिछली सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया तथा अभी तक भी यह फैसला वर्तमान सरकार के पास विचाराधीन है। उपरोक्त निर्णयों के अनुसार अध्यापकों के अनुबंध सेवाकाल की अवधि को प्रथम नियुक्ति से पुरानी पेंशन के लिए जोड़ने को कहा गया है तथा इस लाभ को प्राप्त करने के लिए सैकड़ों (15 मई 2003 से पूर्व नियुक्त) अनुबंध अध्यापकों ने याचिका दायर की है। परंतु अभी तक भी इन अध्यापकों को पुरानी पेंशन के लाभ से दूर रखा गया है। जबकि विद्या उपासकों के मामले में (जोगा सिंह बनाम राज्य सरकार सीडब्ल्यूपी 8953/2013) इसी तरह के फैसले को पिछली सरकार की ओर से लागू कर दिया गया। हालांकि, उनकी नियुक्ति उक्त अनुबंध अध्यापकों के बाद हुई थी। अत: संघ मुख्यमंत्री से मांग करता है कि उपरोक्त सुप्रीम कोर्ट के फैसले को या तो नरेंद्र सिंह नायक या जोगा सिंह के आधार पर जल्द से जल्द लागू करे ताकि, उक्त अनुबंध अध्यापकों को सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ न्याय मिल सके।
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चंद्रमोहन ने बताया कि लगभग 3500 अध्यापक (जेबीटी, सीएंडवी, टीजीटी और प्रवक्ता 15 मई 2003 से पूर्व) नियमों के तहत अनुबंध आधार पर सरकार की ओर से नियुक्त किए गए थे। जिन्हें 8, 10 या 11 साल के लंबे अनुबंध कार्यकाल के बाद नियमित किया गया था। इसी संदर्भ में जोगा सिंह बनाम राज्य सरकार सीडब्ल्यूपी 8953/2013 और पूनम कुमारी बनाम राज्य सरकार सीडब्ल्यूपी 520, 2015 तथा नरेंद्र सिंह नायक बनाम राज्य सरकार केस संख्या 6785, 2008) सुप्रीम कोर्ट से फैसला 2015 में आ गया था। लेकिन, 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी उपरोक्त फैसले को पिछली सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया तथा अभी तक भी यह फैसला वर्तमान सरकार के पास विचाराधीन है। उपरोक्त निर्णयों के अनुसार अध्यापकों के अनुबंध सेवाकाल की अवधि को प्रथम नियुक्ति से पुरानी पेंशन के लिए जोड़ने को कहा गया है तथा इस लाभ को प्राप्त करने के लिए सैकड़ों (15 मई 2003 से पूर्व नियुक्त) अनुबंध अध्यापकों ने याचिका दायर की है। परंतु अभी तक भी इन अध्यापकों को पुरानी पेंशन के लाभ से दूर रखा गया है। जबकि विद्या उपासकों के मामले में (जोगा सिंह बनाम राज्य सरकार सीडब्ल्यूपी 8953/2013) इसी तरह के फैसले को पिछली सरकार की ओर से लागू कर दिया गया। हालांकि, उनकी नियुक्ति उक्त अनुबंध अध्यापकों के बाद हुई थी। अत: संघ मुख्यमंत्री से मांग करता है कि उपरोक्त सुप्रीम कोर्ट के फैसले को या तो नरेंद्र सिंह नायक या जोगा सिंह के आधार पर जल्द से जल्द लागू करे ताकि, उक्त अनुबंध अध्यापकों को सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ न्याय मिल सके।
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