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Hamirpur (Himachal) News: पांच साल में 61 स्कूल बंद, 28 भवनों का हो रहा इस्तेमाल, 33 पर अब भी ताले
Thu, 27 Aug 2026 01:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले कई सरकारी स्कूल अब वीरान पड़े हैं। जिले में पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों के दौरान कम छात्र संख्या के कारण 61 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
इनमें से 28 स्कूल भवनों का आंगनबाड़ी केंद्रों और महिला मंडलों की ओर से किसी न किसी रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि 33 भवन लंबे समय से बंद पड़े हैं। उपयोग और नियमित रखरखाव के अभाव में कई भवन जर्जर होने लगे हैं। ऐसे में बंद स्कूल भवनों की देखरेख शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गई है।
सरकारी स्कूलों में लगातार घट रही छात्र संख्या का असर केवल स्कूलों के संचालन तक सीमित नहीं है। स्कूल बंद होने के बाद खाली पड़े भवनों की सुरक्षा और उपयोग को लेकर भी विभाग के सामने सवाल खड़ा हो गया है। कई स्थानों पर भवनों के कमरे, बरामदे और परिसर लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं।
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ताले लगे रहने से भवनों की हालत खराब होती जा रही है। बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो गई है। कई स्कूल भवनों तक पहुंचने के रास्ते तक बदहाल हो चुके हैं।
कमरों में लगी खिड़कियां, दरवाजे और अन्य सामान भी खराब होने की स्थिति में हैं। कई भवनों के परिसरों में घास और झाड़ियां उग आई हैं। स्कूल बंद होने के बाद शिक्षा विभाग ने इन भवनों को स्थानीय स्तर पर उपयोग में लाने की योजना बनाई थी।
उद्देश्य सरकारी भवनों का सामुदायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल सुनिश्चित करना था। युवक मंडलों, महिला मंडलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को ऐसे भवनों में स्थान उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया था। पंचायतों और अन्य विभागों को भी आवश्यकता के अनुसार इन भवनों के उपयोग की अनुमति देने की व्यवस्था की गई थी।
हालांकि, व्यवहार में सभी बंद स्कूल भवनों को उपयोग में लाना संभव नहीं हो पाया है। इसके चलते 33 भवन लंबे समय से बंद पड़े हैं और इनके रखरखाव की चुनौती लगातार बढ़ रही है।
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हमीरपुर। कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले कई सरकारी स्कूल अब वीरान पड़े हैं। जिले में पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों के दौरान कम छात्र संख्या के कारण 61 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
इनमें से 28 स्कूल भवनों का आंगनबाड़ी केंद्रों और महिला मंडलों की ओर से किसी न किसी रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि 33 भवन लंबे समय से बंद पड़े हैं। उपयोग और नियमित रखरखाव के अभाव में कई भवन जर्जर होने लगे हैं। ऐसे में बंद स्कूल भवनों की देखरेख शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गई है।
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सरकारी स्कूलों में लगातार घट रही छात्र संख्या का असर केवल स्कूलों के संचालन तक सीमित नहीं है। स्कूल बंद होने के बाद खाली पड़े भवनों की सुरक्षा और उपयोग को लेकर भी विभाग के सामने सवाल खड़ा हो गया है। कई स्थानों पर भवनों के कमरे, बरामदे और परिसर लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं।
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ताले लगे रहने से भवनों की हालत खराब होती जा रही है। बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो गई है। कई स्कूल भवनों तक पहुंचने के रास्ते तक बदहाल हो चुके हैं।
कमरों में लगी खिड़कियां, दरवाजे और अन्य सामान भी खराब होने की स्थिति में हैं। कई भवनों के परिसरों में घास और झाड़ियां उग आई हैं। स्कूल बंद होने के बाद शिक्षा विभाग ने इन भवनों को स्थानीय स्तर पर उपयोग में लाने की योजना बनाई थी।
उद्देश्य सरकारी भवनों का सामुदायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल सुनिश्चित करना था। युवक मंडलों, महिला मंडलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को ऐसे भवनों में स्थान उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया था। पंचायतों और अन्य विभागों को भी आवश्यकता के अनुसार इन भवनों के उपयोग की अनुमति देने की व्यवस्था की गई थी।
हालांकि, व्यवहार में सभी बंद स्कूल भवनों को उपयोग में लाना संभव नहीं हो पाया है। इसके चलते 33 भवन लंबे समय से बंद पड़े हैं और इनके रखरखाव की चुनौती लगातार बढ़ रही है।