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वर्मा को मिला कॉपीराइट रिजर्वेशन सर्टिफिकेट
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:12 PM IST
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हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर पांच के रहने वाले पर्यावरणविद् आचार्य रतन लाल वर्मा के प्रोजेक्ट फसलों और बंदरों के संरक्षण को कॉपीराइट रिजर्वेशन सर्टिफिकेट मिला है। अब कोई भी दूसरा व्यक्ति इस प्रोजेक्ट पर अपने स्वामित्व का दावा नहीं ठोक सकेगा। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन आते इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रोमोशन विभाग के कॉपीराइट ऑफिस ने आचार्य रतन लाल वर्मा को उनके प्रोजेक्ट के लिए सर्टिफिकेट भेज दिया है। वर्मा ने प्रदेश भर में बंदरों की उजाड़ से किसानों को बचाने के लिए एक प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत हमीरपुर में बंदर नसबंदी केंद्र स्थापित किया गया। वन विभाग की टीम ने इस प्रोजेक्ट पर काफी कार्य किया। जगह-जगह से बंदरों को पकड़ने और उन्हें नसबंदी केंद्र में शिफ्ट करने का कार्य शुरू हुआ। बंदरों को पकड़ने के लिए लोगों को प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया। इसके साथ ही नसबंदी के बाद इन बंदरों को वापस जंगलों में छोड़ा जाने लगा। इसके साथ ही रतन लाल वर्मा ने प्रोजेक्ट में अतिरिक्त सुझाव जोड़ते हुए कहा कि अगर फसलों को बंदरों से बचाना है तो जंगलों में कैंथ समेत अन्य पेड़ लगाने होंगे ताकि वह जंगलों में ही अपना जीवन यापन कर सकें और बंदर गांव व शहरों का रुख न कर सकें। उधर, रतन लाल वर्मा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि जिस प्रोजेक्ट को वन विभाग के कुछ अधिकारी अपना बताते थे, भारत सरकार ने उन्हें प्रमाणपत्र देकर प्रोजेक्ट का स्वामित्व सौंप दिया है।
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