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अलग-अलग नीतियां कर्मचारियों पर भारी : चंद्रमोहन

Tue, 02 Jan 2018 09:57 PM IST
Updated Tue, 02 Jan 2018 09:57 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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गलोड़ (हमीरपुर) एनपीएस संघ के राज्य सोशल मीडिया प्रभारी चंद्र मोहन ने कहा कि अनुबंध कर्मचारियों को अलग-अलग नीतियां बनाकर नियमित करने से कर्मचारियों में रोष है। कुछ अनुबंध अध्यापक जो 1996 तथा 1997 में नियुक्त हुए थे, उन्हें 8 साल बाद नियमित किया गया। जबकि उसी नीति के तहत 1998 में लगे अनुबंध अध्यापकों को 10 से 11 साल बाद नियमित किया गया तथा शेष को अलग-अलग 5, 6 या 3 साल बाद नियमित किया गया है। अनुबंध कार्यकाल कम किया जाना काबिले तारीफ है, लेकिन इसका लाभ सभी कर्मचारियों को बराबर मिलना चाहिए।

चंद्र मोहन ने बताया कि जो अनुबंध अध्यापक 2003 से पहले नियुक्त हुए थे और जिन्हें 8, 10 या 11 साल बाद नियमित किया गया है उनके हित में (पूनम देवी बनाम राज्य सरकार सी डब्ल्यूपी 520 ऑफ 2015 तथा नरेंद्र नायक बनाम राज्य सरकार केस संख्या 6785 ऑफ 2008) सुप्रीम कोर्ट से फैसला आया है। उसे भी अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसमें 15 मई 2003 से पहले लगे अनुबंध अध्यापकों के सेवाकाल को पुरानी पेंशन के लिए जोड़ने को कहा है। इस लाभ को प्राप्त करने के लिए सैकड़ों ही अध्यापकों ने कोर्ट में केस किया है और बहुत सारे केस करने की तैयारी में हैं। इन अनुबंध अध्यापकों की नियुक्ति 15 मई 2003 से पहले होने के बावजूद उन्हें पुरानी पेंशन के हक से दूर रखा गया है। जबकि विद्या उपासकों के मामले में इस फैसले को लागू कर दिया गया है। उन्होंने सरकार से 2003 से पहले लगे अनुबंध अध्यापकों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को जल्द लागू करने की मांग की है। अनुबंध कर्मचारियों को एक समान नीति बनाकर प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता लाभ प्रदान करने और 15 मई 2003 के बाद लगे सभी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग भी की है।
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