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Hamirpur (Himachal) News: भोरंज की 18 पेयजल योजनाओं का 25 से 50 फीसदी पानी सूखा

Sun, 19 May 2024 03:52 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 May 2024 03:52 AM IST
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25 to 50 percent water of 18 drinking water schemes of Bhoranj is dry.
उठाऊ पेजलय योजना धमरोल के जल स्त्रोत में कम हुआ 25 से 50 फीसदी पानी। संवाद
मुुख्य जल योजना से भी 70 लाख की जगह आ रहा 25 से 30 लाख लीटर पानी
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योजनाओं के घटते जलस्तर से उपमंडल के गांवों में बढ़ने लगा गंभीर पेयजल संकट

संवाद न्यूज एजेंसी

जाहू (हमीरपुर)। विधानसभा क्षेत्र भोरंज के जलशक्ति विभाग उपमंडल की 18 उठाऊ पेयजल योजनाओं में बढ़ती गर्मी की उमस से 25 से 50 फीसदी पानी सूख गया है। दूसरी ओर ब्यास नदी पर बनी प्रदेश की पहली कंप्यूटरीकृत पेयजल मेवा बमसन लगवालती योजना के भी जलस्रोत सूखने लगे हैं। इससे भोरंज उपमंडल में पेयजल संकट पैदा हो गया है। चैंथ और सीर खड्ड के साथ बनी उठाऊ पेयजल योजना बडै़हर, धमरोल व जोल, मैरा ककरोल, पल्ली रोपडी के पेयजल स्रोत सूखना शुरू हो गए हैं। इससे पानी की सप्लाई प्रभावित होना शुरू हो गई है। इसी तरह लगमन्वीं, लुद्दर महादेव, मालियां सधिरयाण फेज एक से चार, कचोटी, सेर महल, नेरी भुक्कड़, धिरड़ पपलाह एक व दो और अन्य पेयजल योजनाओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। इन पेयजल योजनाओं में 25 से 50 फीसदी पानी कम हो चुका है। गर्मी बढ़ने से पानी की यह स्थिति तीन दिन में ही पैदा हो गई है। अगर एक सप्ताह तक गर्मी का प्रकोप इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका पेयजल योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा। इससे आने वाले दिनों में भोरंज उपमंडल के गांवों में गंभीर पेयजल संकट की समस्या पैदा होने वाली है। दो घंटे तक चलने वाली मोटरें एक घंटे तक ही चल रही हैं। इससे जल शक्ति विभाग भोरंज उपमंडल की करीब एक लाख से अधिक आबादी को पीने के पानी की समस्या शुरू हो गई है। दूसरी ओर मेवा बमसन लगवालती उठाऊ पेयजल योजना के जलस्रोत भी सूखने लगे हैं। भोरंज क्षेत्र को इस योजना से 70 लाख लीटर की जगह करीब 25 से 35 लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। क्षेत्र में पेयजल संकट की समस्या पैदा हो गई है। इस बारे में जल शक्ति विभाग उपमंडल भोरंज के सहायक अभियंता आशीष देव ने कहा कि करीब 18 पेयजल योजनाओं के स्रोतों में 25 से 50 फीसदी पानी कम हो चुका है। वहीं, प्रोजेक्ट में भी पानी कम होना शुरू हो गया है। इससे आने वाले समय में पानी का संकट बढ़ सकता है। इस समस्या से बचने के लिए लोगों को पानी का सदुपयोग करना होगा। विभाग ने कनिष्ठ अभियंताओं को फील्ड में जाकर पानी का दुरुपयोग रोकने के आदेश दिए हैं। जिन लोगों ने वर्षा जल संग्रहण टैंकों में नलों को पानी डाला होगा, उनके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
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