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Hamirpur (Himachal) News: राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए 2269 मामले
Sun, 15 Dec 2024 12:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 15 Dec 2024 12:06 AM IST
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हमीरपुर। न्यायिक परिसर हमीरपुर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालतें लगाई गईं। वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए लोग राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचे और मामलों का निपटारा करवाया। दोनों पक्षों ने आपसी समझौते के तहत मामले निपटाए। 34 वर्षीय दिव्यांग राजेंद्र कुमार अपनी पत्नी और तीन साल के बेटे के साथ मामले के निपटारे के लिए पहुंचे हैं। 29 वर्षीय पत्नी ऊषा ने कहा कि बीते वर्ष दिसंबर में बद्दी में कंपनी में ड्यूटी से घर लौटते समय अज्ञात वाहन की चपेट में आने से राजेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। वर्तमान में उनका उपचार टांडा मेडिकल कॉलेज में चला हुआ है।
कंपनी की ओर से उन्हें दुर्घटना का मुआवजा नहीं दिया गया था। इसके लिए उन्होंने पिछले वर्ष से क्लेम किया हुआ था। अब लोक अदालत में उन्हें 15 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। वहीं, पलाणा निवासी अमरनाथ अपनी रिश्तेदार महिला ऊषा देवी के साथ सात वर्षों से लंबित तलाक के मामले के समझौते के लिए पहुंचे हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते के बाद मामले का निपटारा हुआ। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक रिकवरी, वैवाहिक विवाद मामले, चेक बाउंस केस, जमीन विवाद, मोटर व्हीकल एक्ट, घरेलू हिंसा सहित अन्य मामलों का निपटारा किया गया। इसके अतिरिक्त अदालतों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए नादौन और बड़सर में भी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गईं। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज असलम बेग ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुल 8135 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें से 2269 मामलों का निपटारा कर दिया गया। इन मामलों में 2.07 करोड़ से अधिक की सेटलमेंट राशि वसूली गई। लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत एक बहुत ही अच्छा माध्यम है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई जाती हैं। लोगों को इन अदालतों का लाभ उठाना चाहिए। इससे लोगों के बहुमूल्य समय और धन की बचत होती है।
इन मामलों का हुआ निपटारा
प्री लिटिगेशन (कोर्ट में आने से पूर्व दर्ज हुए 863 मामलों में से 161 का निपटारण राष्ट्रीय लोक अदालत में हुआ। 26,59,576 रुपये की राशि वसूल की गई। कोर्ट में चले 658 मामलों में से 398 का निपटारण हुआ। इनमें 1,69,99,178 रुपये, एमवी मामले (मोटर व्हीकल एक्ट चालान और दुर्घटना) के 6614 मामलों में से 1710 का निपटारण किया गया और 11,19,000 रुपये वसूल किए गए। जिला के तीन न्यायिक परिसरों में कुल 8135 मामले आए थे। इनमें 2269 मामलों का निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालतों में किया गया। इन अदालतों में 2,07,77,754 रुपये की राशि का निवारण किया गया।
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कंपनी की ओर से उन्हें दुर्घटना का मुआवजा नहीं दिया गया था। इसके लिए उन्होंने पिछले वर्ष से क्लेम किया हुआ था। अब लोक अदालत में उन्हें 15 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। वहीं, पलाणा निवासी अमरनाथ अपनी रिश्तेदार महिला ऊषा देवी के साथ सात वर्षों से लंबित तलाक के मामले के समझौते के लिए पहुंचे हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते के बाद मामले का निपटारा हुआ। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक रिकवरी, वैवाहिक विवाद मामले, चेक बाउंस केस, जमीन विवाद, मोटर व्हीकल एक्ट, घरेलू हिंसा सहित अन्य मामलों का निपटारा किया गया। इसके अतिरिक्त अदालतों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए नादौन और बड़सर में भी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गईं। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज असलम बेग ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुल 8135 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें से 2269 मामलों का निपटारा कर दिया गया। इन मामलों में 2.07 करोड़ से अधिक की सेटलमेंट राशि वसूली गई। लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत एक बहुत ही अच्छा माध्यम है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई जाती हैं। लोगों को इन अदालतों का लाभ उठाना चाहिए। इससे लोगों के बहुमूल्य समय और धन की बचत होती है।
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इन मामलों का हुआ निपटारा
प्री लिटिगेशन (कोर्ट में आने से पूर्व दर्ज हुए 863 मामलों में से 161 का निपटारण राष्ट्रीय लोक अदालत में हुआ। 26,59,576 रुपये की राशि वसूल की गई। कोर्ट में चले 658 मामलों में से 398 का निपटारण हुआ। इनमें 1,69,99,178 रुपये, एमवी मामले (मोटर व्हीकल एक्ट चालान और दुर्घटना) के 6614 मामलों में से 1710 का निपटारण किया गया और 11,19,000 रुपये वसूल किए गए। जिला के तीन न्यायिक परिसरों में कुल 8135 मामले आए थे। इनमें 2269 मामलों का निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालतों में किया गया। इन अदालतों में 2,07,77,754 रुपये की राशि का निवारण किया गया।
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