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शिक्षा विभाग के बहुचर्चित स्टेशनरी बिल घोटाले की जांच शुरू
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हमीरपुर। शिक्षा विभाग के बहुचर्चित स्टेशनरी बिल घोटाले की जांच शुरू हो गई है। एसएसए और आरएमएसए के जिला परियोजना अधिकारी ने अमर उजाला में 30 जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा खंड हमीरपुर और सुजानपुर के तमाम प्रधानाचार्यों को निर्देश जारी कर टीजीटी आर्ट्स और टीजीटी साइंस के अध्यापकों को नोटपैड और पेन सहित स्कूल बुलाया है। उन्होंने प्रशिक्षण सेमिनार के दौरान नोटपैड पर लिखी गई सामग्री की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन नोटपैड और पेन के प्रिंट रेट को उनके कार्यालय में 28 फरवरी से पूर्व भेजने के निर्देश जारी किए हैं ताकि समय पर वह यह जानकारी उच्चाधिकारियों को आगामी कार्रवाई के लिए भेज सकें। बता दें कि बीते अक्तूबर और नवंबर माह में प्रदेशभर के स्कूलों के अध्यापकों के लिए खंड स्तर पर प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन किया गया था।
इसके तहत हमीरपुर जिला के सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के लिए पांच-पांच दिन के प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन सभी खंडों में किया गया। इस सेमिनार में भाग लेने वाले प्रत्येक अध्यापक को विभाग की तरफ से पेन और कान्फ्रेंस पैड वितरित किए गए थे। सेमिनार में वितरित की गई यह शिक्षण सामग्री शिक्षा विभाग की तरफ से खरीदी गई थी। जिसके बिल संबंधित प्रभारी ने विभाग में जमा करवाए हैं। सेमिनार खत्म होने के दो माह के बाद सामग्री के बिलों में गड़बड़झाला सामने आया। जिसमें पांच रुपये के पेन का सरकारी बिल में रेट सात रुपये और दस रुपये के कान्फ्रेंस पैड का बिल 13 रुपये बनाकर सरकारी राशि का गबन हुआ है। जिला हमीरपुर के सरकारी स्कूलों में सेवारत कुछ अध्यापकों ने इस मामले की शिकायत सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी को भेजी। शिकायतकर्ताओं ने विभाग के नाम पर बनाए गए बिल और पैन व कान्फ्रेंस पैड के रेपर पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य को दर्शाते रेपर भी भेजे। अमर उजाला ने भी इस गड़बड़झाले की खबर को 30 जनवरी वाले अंक में प्रमुखता से छापा। अब जिला परियोजना अधिकारी ने इस पर संज्ञान लेते हुए प्रधानाचार्यों को अध्यापकों को पेन और नोटपैड सहित स्कूल बुलाने और छानबीन कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में एसएसए एवं आरएमएसए के जिला परियोजना अधिकारी एवं प्रधानाचार्य डाईट गौना करौर हमीरपुर राजेंद्र पाल का कहना है कि इस मामले से संबंधित सुजानपुर और हमीरपुर शिक्षा खंडों के अध्यापकों को नोटपैड सहित स्कूल बुलाने और प्रशिक्षण सेमिनार के दौरान लिखी गई बातों की जांच करने व नोटपैड का प्रिंट मूल्य रिपोर्ट में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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इसके तहत हमीरपुर जिला के सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के लिए पांच-पांच दिन के प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन सभी खंडों में किया गया। इस सेमिनार में भाग लेने वाले प्रत्येक अध्यापक को विभाग की तरफ से पेन और कान्फ्रेंस पैड वितरित किए गए थे। सेमिनार में वितरित की गई यह शिक्षण सामग्री शिक्षा विभाग की तरफ से खरीदी गई थी। जिसके बिल संबंधित प्रभारी ने विभाग में जमा करवाए हैं। सेमिनार खत्म होने के दो माह के बाद सामग्री के बिलों में गड़बड़झाला सामने आया। जिसमें पांच रुपये के पेन का सरकारी बिल में रेट सात रुपये और दस रुपये के कान्फ्रेंस पैड का बिल 13 रुपये बनाकर सरकारी राशि का गबन हुआ है। जिला हमीरपुर के सरकारी स्कूलों में सेवारत कुछ अध्यापकों ने इस मामले की शिकायत सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी को भेजी। शिकायतकर्ताओं ने विभाग के नाम पर बनाए गए बिल और पैन व कान्फ्रेंस पैड के रेपर पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य को दर्शाते रेपर भी भेजे। अमर उजाला ने भी इस गड़बड़झाले की खबर को 30 जनवरी वाले अंक में प्रमुखता से छापा। अब जिला परियोजना अधिकारी ने इस पर संज्ञान लेते हुए प्रधानाचार्यों को अध्यापकों को पेन और नोटपैड सहित स्कूल बुलाने और छानबीन कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में एसएसए एवं आरएमएसए के जिला परियोजना अधिकारी एवं प्रधानाचार्य डाईट गौना करौर हमीरपुर राजेंद्र पाल का कहना है कि इस मामले से संबंधित सुजानपुर और हमीरपुर शिक्षा खंडों के अध्यापकों को नोटपैड सहित स्कूल बुलाने और प्रशिक्षण सेमिनार के दौरान लिखी गई बातों की जांच करने व नोटपैड का प्रिंट मूल्य रिपोर्ट में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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