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दर्जा सीएचसी का, सुविधा पीएचसी की

Thu, 16 Nov 2017 11:03 PM IST
Updated Thu, 16 Nov 2017 11:03 PM IST
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बड़सर(हमीरपुर)। उपमंडल के तहत ढटवाल क्षेत्र के लोगों के लिए बिझड़ी अस्पताल को सीएचसी का दर्जा मिल गया लेकिन अस्पताल में इस स्तर की सुविधा नहीं मिल पाई है। हालत यह है कि शाम पांच बचे के बाद अस्पताल में सन्नाटा छा जाता है। रात के समय अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल जांच व उपचार की कोई सुविधा नहीं है। इसके साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस व फूड सेफ्टी लाइसेंस के लिए मेडिकल जांच सुविधा की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में एक डॉक्टर व एक फार्मासिस्ट का पद खाली है। स्थानीय लोगों ने अस्पताल में बेहतर सुविधा देने की मांग की है। 9 अक्तूबर 2016 को बिझड़ी अस्पताल को पीएचसी से सीएचसी का दर्जा देने की घोषणा हुई।
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इसके तहत अस्पताल में डॉक्टर व अन्य मेडिकल स्टाफ की सुविधा दी जानी थी, लेकिन एक साल बाद भी अस्पताल को डॉक्टर नहीं मिल पाया है। चार नर्सों की तैनाती अवश्य कर दी गई। रात को इमरजेंसी सुविधा नहीं होने से जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाया है। अस्पताल में कमरों की कमी पहले से ही खल रही है। अस्पताल भवन की मरम्मत भी नहीं हो पाई है। भवन की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। बारिश होने पर छत से पानी टपकने लगता है। मौजूदा समय में अस्पताल में दो डॉक्टर हैं लेकिन रात को ड्यूटी नहीं होने से लोगों को इमरजेंसी आदि की सुविधा नहीं हो पाई है। क्षेत्र के लोगों नानक चंद, सुरेश कुमार, अमर नाथ, मनीष कुमार, सतीश कुमार, जगतार सिंह, अनिल कुमार, संतोष कुमार, बीरवल सहित अन्य लोगों का कहना है कि शाम पांच बजे के बाद अस्पताल परिसर सुनसान हो जाता है। आंख की जांच व एक्स-रे की सुविधा भी नहीं है। स्थानीय लोगों ने अस्पताल में सुविधा मुहैया करवाने की मांग की है।
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बीएमओ बड़सर एचआर कालिया का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के चलते अस्पताल में रात के समय जांच की सुविधा मुहैया नहीं हो पाई है। अस्पताल में रिक्त पदों पर डॉक्टरों की तैनाती के बाद रात्रि सुविधा मुहैया करवा दी जाएगी। अस्पताल में मेडिकल सर्टिफिकेट सुविधा के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ व रेडियोग्राफर का पद होना अनिवार्य होता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के भवन की मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है।
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