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हमीरपुर में आईपीएच के प्रोजेक्टों का निरीक्षण 9 को
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:25 PM IST
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर में सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं पर खर्च हुए बजट और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को जांचने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय शिमला से क्वालिटी कंट्रोल विंग की टीम 9 सितंबर को हमीरपुर आ रही है। क्वालिटी कंट्रोल विभाग के प्रमुख आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू के साथ विशेषज्ञ अधिकारियों की पूरी टीम होगी। इस टीम में लोनिवि, आईपीएच और बिजली बोर्ड से अधीक्षण अभियंता समेत अन्य इंजीनियर भी शामिल रहेंगे।
जिला हमीरपुर में वर्ष 2011-12 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में ढाई सौ करोड़ के तीन बड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए थे। जिसमें 156 करोड़ रुपये की विधानसभा क्षेत्र नादौन की सबसे महत्वपूर्ण मध्यम सिंचाई योजना शामिल है। इस योजना से विस क्षेत्र की 2980 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस योजना पर 90 फीसदी केंद्र सरकार और 10 फीसदी राज्य सरकार ने खर्च करना था। लेकिन, अभी तक 70 लाख रुपये केवल प्रदेश सरकार ने ही खर्च किए हैं। जबकि केंद्र से अठन्नी तक नहीं आई। इसके साथ ही हमीरपुर शहर की 64 करोड़ की लागत से बनने वाली इंप्रूवमेंट एंड रिमॉलडिंग ऑफ लिफ्ट वाटर सप्लाई स्कीम (आरआरएलडब्ल्यूएसएस) शामिल है। इसका कार्य भी अंतिम चरण में है। वहीं 35 करोड़ की लागत से प्रस्तावित विधानसभा क्षेत्र बड़सर के तहत बनने वाली ब्यास वाटर सप्लाई स्कीम का कार्य भी अधर में लटका है। क्वालिटी कंट्रोल विभाग इन तीनों बड़े प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपेगा। उधर, आईपीएच विभाग के चीफ इंजीनियर इंजीनियर आरके महाजन ने कहा कि क्वालिटी कंट्रोल विभाग शिमला से एक टीम 9 सितंबर को हमीरपुर में आ रही है जो हमीरपुर में आईपीएच विभाग की परियोजनाओं का निरीक्षण करेगी।
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जिला हमीरपुर में वर्ष 2011-12 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में ढाई सौ करोड़ के तीन बड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए थे। जिसमें 156 करोड़ रुपये की विधानसभा क्षेत्र नादौन की सबसे महत्वपूर्ण मध्यम सिंचाई योजना शामिल है। इस योजना से विस क्षेत्र की 2980 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस योजना पर 90 फीसदी केंद्र सरकार और 10 फीसदी राज्य सरकार ने खर्च करना था। लेकिन, अभी तक 70 लाख रुपये केवल प्रदेश सरकार ने ही खर्च किए हैं। जबकि केंद्र से अठन्नी तक नहीं आई। इसके साथ ही हमीरपुर शहर की 64 करोड़ की लागत से बनने वाली इंप्रूवमेंट एंड रिमॉलडिंग ऑफ लिफ्ट वाटर सप्लाई स्कीम (आरआरएलडब्ल्यूएसएस) शामिल है। इसका कार्य भी अंतिम चरण में है। वहीं 35 करोड़ की लागत से प्रस्तावित विधानसभा क्षेत्र बड़सर के तहत बनने वाली ब्यास वाटर सप्लाई स्कीम का कार्य भी अधर में लटका है। क्वालिटी कंट्रोल विभाग इन तीनों बड़े प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपेगा। उधर, आईपीएच विभाग के चीफ इंजीनियर इंजीनियर आरके महाजन ने कहा कि क्वालिटी कंट्रोल विभाग शिमला से एक टीम 9 सितंबर को हमीरपुर में आ रही है जो हमीरपुर में आईपीएच विभाग की परियोजनाओं का निरीक्षण करेगी।
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