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मनरेगा मजदूर नहीं एकत्रित करेंगे जंगलों से चीड़ की पत्तियां
Updated Tue, 15 May 2018 10:57 PM IST
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हमीरपुर। जिला के जंगलों में पड़ी चीड़ की पत्तियों को मनरेगा मजदूर एकत्रित नहीं करेंगे। इसके लिए मनरेगा में सेल्फ नहीं डली है। वन विभाग ने ग्रामीणों को मनरेगा के तहत कार्य देने के लिए मनरेगा मजदूरों द्वारा पत्तियां एकत्रित करने का निर्णय लिया था, लेकिन मनरेगा में इसकी सेल्फ न डलने के कारण अब इन मजदूरों को वन विभाग का यह रोजगार नहीं मिलेगा। वन विभाग ने अब अंबुजा कंपनी से इन पत्तियों को उठाने के टेंडर कर लिए हैं। कंपनी 1.75 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से इन पत्तियों को उठाएगी और कोयला इत्यादि बनाएगी।
फायर सीजन के दौरान चीड़ की पत्तियों से जंगलों में आग भड़कने का खतरा बढ़ जाता है। चीड़ की पत्तियों में लगी हल्की आग पूरे जंगल को राख कर देती है। इसके लिए विभाग जंगलों से हर वर्ष इन पत्तियों को उठा लेता है। इस वर्ष विभाग ने इन पत्तियों को मनरेगा के तहत एकत्रित करने और कंपनी को बेचने का निर्णय लिया ताकि मनरेगा मजदूरों को इससे रोजगार मिल सके, लेकिन मनरेगा में इसकी सेल्फ नहीं डल पाई। इस कारण अब अंबुजा कंपनी सीधे तौर पर जंगलों में पड़ी चीड़ की पत्तियों को उठाएगी। इस संबंध में डीएफओ हमीरपुर प्रीति भंडारी का कहना है कि मनरेगा में सेल्फ न डलने के कारण अब मनरेगा मजदूर इन पत्तियों को नहीं उठाएंगे। अंबुजा कंपनी 1.75 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से इन पत्तियों को उठाएगी।
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फायर सीजन के दौरान चीड़ की पत्तियों से जंगलों में आग भड़कने का खतरा बढ़ जाता है। चीड़ की पत्तियों में लगी हल्की आग पूरे जंगल को राख कर देती है। इसके लिए विभाग जंगलों से हर वर्ष इन पत्तियों को उठा लेता है। इस वर्ष विभाग ने इन पत्तियों को मनरेगा के तहत एकत्रित करने और कंपनी को बेचने का निर्णय लिया ताकि मनरेगा मजदूरों को इससे रोजगार मिल सके, लेकिन मनरेगा में इसकी सेल्फ नहीं डल पाई। इस कारण अब अंबुजा कंपनी सीधे तौर पर जंगलों में पड़ी चीड़ की पत्तियों को उठाएगी। इस संबंध में डीएफओ हमीरपुर प्रीति भंडारी का कहना है कि मनरेगा में सेल्फ न डलने के कारण अब मनरेगा मजदूर इन पत्तियों को नहीं उठाएंगे। अंबुजा कंपनी 1.75 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से इन पत्तियों को उठाएगी।
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