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एसजेवीएन को एक साल में पूरी करनी होंगी सारी औपचारिकताएं
Updated Thu, 11 Oct 2018 11:20 PM IST
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हमीरपुर। सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) की हमीरपुर स्थित धौलासिद्ध बिजली परियोजना को एनओसी के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने औपचारिकताओं को पूरी करने के लिए एक वर्ष की मोहलत दी है। जिला हमीरपुर की ब्यास नदी में प्रस्तावित 66 मेगावाट का यह बिजली प्रोजेक्ट करीब एक दशक से अधर में लटका है। बिजली परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि हमीरपुर और कांगड़ा दो जिलों से जुड़ी है। वर्ष 2008-09 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने हमीरपुर की ब्यास नदी पर बिजली परियोजना के लिए एसजेवीएन को स्वीकृति प्रदान की थी।
इसके बाद मार्च 2012 में एसजेवीएन को धौलासिद्ध बिजली परियोजना के निर्माण कार्य के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण की सैद्धांतिक मंजूरी मिली। लेकिन, अभी तक कंपनी को द्वितीय चरण की मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस पावर प्रोजेक्ट के बनने से स्थानीय लोगों समेत प्रदेश के सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही ब्यास नदी से बिजली भी पैदा हो सकेगी, जिससे कई घरों को बिजली मिलेगी। बता दें कि कंपनी को इस बिजली प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए एनवीपी (नेट प्रेजेंट वैल्यू), सीए (कंपनशेटरी आफोरेस्टेशन) और सीटी (कॉस्ट ऑफ ट्री) समेत राजस्व से संबंधित अन्य शर्तों को पूरा करना है। प्रस्तावित भूमि पर वन संपदा के बदले कंपनी ने करीब 15 करोड़ रुपये भी जमा करवा दिए हैं। जबकि प्रतिपूरक पौधरोपण होना है।
देरी के साथ लागत भी बढ़ी
पूर्वा मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय जब ब्यास नदी पर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई तो उस समय बिजली परियोजना की अनुमानित लागत 499 करोड़ रखी गई थी। जो अब पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी हासिल करने में हो रही देरी के चलते बढ़ती जा रही है। वर्तमान में इसकी संशोधित अनुमानित लागत 789 करोड़ पहुंच चुकी है। जो आने वाले समय में और अधिक बढ़ सकती है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
वन विभाग की डीएफओ प्रीति भंडारी ने कहा कि एसजेवीएन की धौलासिद्ध पावर प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जबकि द्वितीय चरण की मंजूरी मिलना अभी बाकी है, जिसके लिए एक वर्ष का समय दिया गया है।
वहीं एजेवीएन के धौलासिद्ध बिजली परियोजना के हैड ऑफ द प्रोजेक्ट विनोद आनंद का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जबकि द्वितीय चरण की मंजूरी मिलना बाकी है। फोरेस्ट क्लीयरेंस समेत अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि एनओसी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
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इसके बाद मार्च 2012 में एसजेवीएन को धौलासिद्ध बिजली परियोजना के निर्माण कार्य के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण की सैद्धांतिक मंजूरी मिली। लेकिन, अभी तक कंपनी को द्वितीय चरण की मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस पावर प्रोजेक्ट के बनने से स्थानीय लोगों समेत प्रदेश के सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही ब्यास नदी से बिजली भी पैदा हो सकेगी, जिससे कई घरों को बिजली मिलेगी। बता दें कि कंपनी को इस बिजली प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए एनवीपी (नेट प्रेजेंट वैल्यू), सीए (कंपनशेटरी आफोरेस्टेशन) और सीटी (कॉस्ट ऑफ ट्री) समेत राजस्व से संबंधित अन्य शर्तों को पूरा करना है। प्रस्तावित भूमि पर वन संपदा के बदले कंपनी ने करीब 15 करोड़ रुपये भी जमा करवा दिए हैं। जबकि प्रतिपूरक पौधरोपण होना है।
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देरी के साथ लागत भी बढ़ी
पूर्वा मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय जब ब्यास नदी पर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई तो उस समय बिजली परियोजना की अनुमानित लागत 499 करोड़ रखी गई थी। जो अब पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी हासिल करने में हो रही देरी के चलते बढ़ती जा रही है। वर्तमान में इसकी संशोधित अनुमानित लागत 789 करोड़ पहुंच चुकी है। जो आने वाले समय में और अधिक बढ़ सकती है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
वन विभाग की डीएफओ प्रीति भंडारी ने कहा कि एसजेवीएन की धौलासिद्ध पावर प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जबकि द्वितीय चरण की मंजूरी मिलना अभी बाकी है, जिसके लिए एक वर्ष का समय दिया गया है।
वहीं एजेवीएन के धौलासिद्ध बिजली परियोजना के हैड ऑफ द प्रोजेक्ट विनोद आनंद का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जबकि द्वितीय चरण की मंजूरी मिलना बाकी है। फोरेस्ट क्लीयरेंस समेत अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि एनओसी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।