Himachal: अब स्नातक डिग्री वाले बनेंगे सचिवालय में स्टेनो टाइपिस्ट, सरकार ने लागू किए नए भर्ती नियम
प्रदेश सचिवालय में स्टेनो टाइपिस्ट के लिए नए भर्ती नियम लागू कर दिए गए हैं। इस पद के लिए अब बारहवीं नहीं, स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी।
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हिमाचल प्रदेश सचिवालय में स्टेनो टाइपिस्ट के लिए नए भर्ती नियम लागू कर दिए गए हैं। इस पद के लिए अब बारहवीं नहीं, स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी। अभ्यर्थियों को हिंदी और अंग्रेजी भाषा में शॉर्टहैंड और कंप्यूटर टाइपिंग दक्षता भी साबित करनी होगी। सरकार ने वीरवार को राजपत्र में सचिवालय प्रशासन सेवाओं के तहत स्टेनो टाइपिस्टों की भर्ती एवं सेवा शर्तों से संबंधित नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। अधिसूचना के अनुसार सचिवालय में स्टेनो टाइपिस्ट के 20 स्वीकृत पद हैं। नियम के अनुसार 80 प्रतिशत पद सीधी भर्ती अथवा नियमितीकरण से भरे जाएंगे, जबकि 20 प्रतिशत सेकेंडमेंट आधार पर भरने का प्रावधान है। भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव शैक्षणिक योग्यता और कौशल परीक्षण को लेकर किया गया है। अब अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना जरूरी होगा। साथ ही अंग्रेजी-हिंदी में 60 शब्द प्रति मिनट की शॉर्टहैंड गति निर्धारित की गई है। वहीं, कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग के लिए 35 शब्द प्रति मिनट और हिंदी टाइपिंग के लिए 30 शब्द प्रति मिनट की गति होनी चाहिए।
हिंदी या अंग्रेजी में शॉर्टहैंड परीक्षा पास करना जरूरी
उम्मीदवार को हिंदी या अंग्रेजी में से किसी एक भाषा में शॉर्टहैंड परीक्षा पास करनी होगी, लेकिन नियुक्ति के बाद दो वर्ष के भीतर दूसरी भाषा में भी शॉर्टहैंड परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर वेतन वृद्धि से जुड़े प्रावधान प्रभावित हो सकते हैं। सीधी भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को आयु में छूट मिलेगी।
एसएमसी अनुदान सहायता जारी करने के निर्देश
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सिरमौर के उप शिक्षा निदेशक को उच्च न्यायालय के आदेश पर एसएमसी अनुदान सहायता जारी करने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने 24 जून 2026 को एक मामले में यह आदेश दिया था। न्यायालय ने प्रतिवादियों को आठ सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार अनुदान सहायता का भुगतान करने का निर्देश दिया है। निदेशालय ने सिरमौर के उप शिक्षा निदेशक को याचिकाकर्ता के मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। यदि याचिकाकर्ता का मामला विल्लम सिंह के मामले के समान पाया जाता है, तो उसे देय और स्वीकार्य अनुदान सहायता जारी की जाएगी। यह प्रक्रिया सुनवाई का अवसर प्रदान करने और उचित आदेश पारित करने के बाद पूरी की जाएगी।