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हिमाचल में शिक्षा का सच: कभी धूप, कभी ठंड की मार, टीन के शेड में पढ़ रहे 31 नौनिहाल

Sat, 31 Oct 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh राजपाल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, सतौन (सिरमौर)।
राजपाल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, सतौन (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 31 Oct 2026 05:30 AM IST
सार

सिरमाैर जिले के शिक्षा खंड पांवटा साहिब की अजोली पंचायत के छलुवाला में 31 बच्चों का भविष्य एक टीन के शेड में संवर रहा है। 

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Education  Reality: Exposed to the elements scorching sun and biting cold 31 young children are studying under
छलुवाला प्राथमिक पाठशाला, टीन के शेड में पढ़ रहे 31 नौनिहाल। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सिरमाैर जिले के शिक्षा खंड पांवटा साहिब की अजोली पंचायत के छलुवाला में 31 बच्चों का भविष्य एक टीन के शेड में संवर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस टीन शेड में बच्चों की कक्षाएं लगती हैं, उसी के एक कोने में मिड-डे मील भी पकाया जाता है। छलुवाला में गुज्जर समुदाय के परिवार रहते हैं। यहां के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से अक्तूबर 2022 में प्रदेश सरकार ने प्राथमिक पाठशाला खोली। स्कूल शुरू होने से क्षेत्र के बच्चों को घर के समीप शिक्षा की सुविधा तो मिली, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद स्कूल को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया। वर्तमान में पांचवीं कक्षा तक के 31 बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई के लिए विभाग के पास एक टीन शेड है, वह भी बिना दीवारों का। गर्मियों में टीन की छत तपने से बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ती है, जबकि सर्दियों में खुले शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं है। बारिश और खराब मौसम में भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक ही छोटे से शेड में कक्षाएं संचालित करने के साथ मिड-डे मील तैयार किया जाता है।

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झोपड़ी में स्कूल का रिकॉर्ड, छुट्टी पर अध्यापक घर ले जाते हैं रजिस्टर
स्कूल में भवन न होने का असर केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। शिक्षकों को भी रोजाना कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। स्कूल का सामान एक ऐसी झोपड़ी में रखा जाता है, जिसमें दरवाजा तक नहीं है। रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज को सुरक्षित रखने के लिए भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। मौसम खराब होने या अवकाश के दिन अध्यापकों को स्कूल के रजिस्टर अपने साथ घर ले जाने पड़ते हैं। स्कूल के प्रभारी जीवन सिंह सिंगटा ने बताया कि पाठशाला एक टीन शेड में चल रही है। इसी शेड में मिड-डे मील भी तैयार किया जाता है। भवन के अभाव में स्कूल को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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एसएमसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल
एसएमसी अध्यक्ष नेका ने कहा कि स्कूल के लिए भवन नहीं होने से बच्चों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आज के आधुनिक दौर में भी बच्चों को बिना भवन वाले स्कूल में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने स्कूल के लिए जल्द भवन उपलब्ध करवाने की मांग की।

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विभाग से किया जा है पत्राचार
शिक्षा खंड अधिकारी राजपाल चौधरी ने बताया कि वन विभाग के साथ इस मामले में पत्राचार किया जा रहा है। इसमें करीब छह महीने का समय और लग सकता है। जमीन उपलब्ध होने के बाद ही स्कूल भवन के लिए बजट स्वीकृत हो पाएगा। विभाग की ओर से भवन निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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