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हिमाचल: उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन बोले- युवा नशे से बनाएं दूरी, राष्ट्र सर्वोपरि नवाचार पर करें फोकस
Sun, 15 Mar 2026 10:35 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 15 Mar 2026 10:35 AM IST
सार
सीयू धर्मशाला के दीक्षांत समारोह में उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं को नशे को न कहने और राष्ट्र को हमेशा सर्वोपरि रखने की सीख दी। पढ़ें पूरी खबर...
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उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन पूजा अर्चना करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने केंद्रीय विवि (सीयू) धर्मशाला के दीक्षांत समारोह में युवाओं से राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित होने, नशे को न कहने और राष्ट्र को हमेशा सर्वोपरि रखने की सीख दी। उन्होंने विवि की ओर से कम्युनिटी लैब पहल और नशामुक्त परिसर की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने खुशी जताई कि दीक्षांत समारोह में पदक विजेताओं में अधिकांश महिलाएं थीं, जो देश की प्रगति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तीकरण और योगदान को दर्शाता है। उप राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश की देवभूमि और वीरभूमि के रूप में प्रशंसा करते हुए कहा कि इस राज्य ने देश के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह अपनी समृद्ध मेहमाननबाजी, संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली बनाने के लिए संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहिए।
उप राष्ट्रपति ने राज्य युद्ध संग्रहालय धर्मशाला पहुंचकर शहीद सैनिकों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियां और घाटियां ऐसे वीर सैनिकों की पीढ़ियों को जन्म देती रही हैं, जिनके साहस, पराक्रम और देशभक्ति ने राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। देवभूमि ने देश की सशस्त्र सेनाओं को हमेशा वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने सीमाओं की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी है। हमारे बहादुर सैनिकों का साहस और बलिदान सदैव राष्ट्र के हृदय में अंकित रहेगा। उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों को भी देश सेवा और राष्ट्र के सर्वोच्च मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
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उन्होंने खुशी जताई कि दीक्षांत समारोह में पदक विजेताओं में अधिकांश महिलाएं थीं, जो देश की प्रगति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तीकरण और योगदान को दर्शाता है। उप राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश की देवभूमि और वीरभूमि के रूप में प्रशंसा करते हुए कहा कि इस राज्य ने देश के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह अपनी समृद्ध मेहमाननबाजी, संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली बनाने के लिए संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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उप राष्ट्रपति ने राज्य युद्ध संग्रहालय धर्मशाला पहुंचकर शहीद सैनिकों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियां और घाटियां ऐसे वीर सैनिकों की पीढ़ियों को जन्म देती रही हैं, जिनके साहस, पराक्रम और देशभक्ति ने राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। देवभूमि ने देश की सशस्त्र सेनाओं को हमेशा वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने सीमाओं की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी है। हमारे बहादुर सैनिकों का साहस और बलिदान सदैव राष्ट्र के हृदय में अंकित रहेगा। उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों को भी देश सेवा और राष्ट्र के सर्वोच्च मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
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माता चामुंडा मंदिर में नवाया शीश, की पूजा-अर्चना
उपराष्ट्रपति परिधि गृह से सड़क मार्ग से श्री चामुंडा माता मंदिर पहुंचे। यहां माता के चरणों में शीश नवाया और पूजा-अर्चना की। वह सड़क मार्ग से गगल एयरपोर्ट पहुंचे और चौपर के माध्यम से वापस दिल्ली के लिए रवाना हुए।
उपराष्ट्रपति परिधि गृह से सड़क मार्ग से श्री चामुंडा माता मंदिर पहुंचे। यहां माता के चरणों में शीश नवाया और पूजा-अर्चना की। वह सड़क मार्ग से गगल एयरपोर्ट पहुंचे और चौपर के माध्यम से वापस दिल्ली के लिए रवाना हुए।
भारतीय शिक्षा परंपरा ज्ञान, मूल्यों और समग्र विकास पर आधारित : कविंद्र गुप्ता
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के सामंजस्यपूर्ण समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा है।
उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें। राज्यपाल हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के 9वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 23 मेधावी छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संकल्प की सफलता को दर्शाता है, क्योंकि आज बेटियां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में लागू करने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के सामंजस्यपूर्ण समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा है।
उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें। राज्यपाल हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के 9वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 23 मेधावी छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संकल्प की सफलता को दर्शाता है, क्योंकि आज बेटियां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में लागू करने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।