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हिमाचल: नाबालिग नातिन से दुष्कर्म के दोषी नाना को पांच साल का कठोर कारावास, आठ हजार रुपये जुर्माना; जानें
Thu, 01 Oct 2026 09:36 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 01 Oct 2026 09:36 AM IST
सार
धर्मशाला की फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग लड़की से यौन अपराध के मामले में उसके नाना को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में अभियोजन पक्ष ने 25 गवाह पेश किए थे और मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे गए।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
नाबालिग नातिन से यौन अपराध के मामले में धर्मशाला की फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी नाना को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की विशेष पॉक्सो अदालत ने सुनाया। मामला धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले एक क्षेत्र से संबंधित है और फरवरी 2025 में पुलिस थाने में दर्ज किया गया था।
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नाना के साथ रहती थी नाबालिग
मामले के अनुसार पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि वह अपने नाना के साथ रहती थी। शिकायत में नाना पर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण करवाया गया और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों को जुटाया गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
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अदालत में पेश किए गए 25 गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कुल 25 गवाह पेश किए। इसके अलावा पीड़िता के बयान दर्ज किए गए और चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।
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साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार
अदालत ने मामले की पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने उसे पांच वर्ष के कठोर कारावास और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने पैरवी की, जबकि नायब कोर्ट यशपाल ने सहयोग किया।
अदालत ने मामले की पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने उसे पांच वर्ष के कठोर कारावास और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने पैरवी की, जबकि नायब कोर्ट यशपाल ने सहयोग किया।