नई व्यवस्था: एक क्लिक पर बिजली बिल भर सकेंगे उपभोक्ता, सभी भुगतान विकल्प एक मंच पर लाएगा बोर्ड
यूपीआई, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, भारत बिल पेमेंट सिस्टम, आरटीजीएस-एनईएफटी, क्यूआर कोड, पीओएस मशीन और व्हाट्सएप पेमेंट जैसे अलग-अलग डिजिटल माध्यमों को अब एक ही मंच पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के करीब 30 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिल भुगतान की प्रक्रिया जल्द ही पूरी तरह बदलने वाली है। यूपीआई, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, भारत बिल पेमेंट सिस्टम, आरटीजीएस-एनईएफटी, क्यूआर कोड, पीओएस मशीन और व्हाट्सएप पेमेंट जैसे अलग-अलग डिजिटल माध्यमों को अब एक ही मंच पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य बिजली बोर्ड ने इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृत पेमेंट एग्रीगेटर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और चैनलों के बीच भटकना नहीं पड़ेगा।
भुगतान सीधे एकीकृत डिजिटल प्रणाली में दर्ज होगा
किसी भी माध्यम से किया गया भुगतान सीधे एकीकृत डिजिटल प्रणाली में दर्ज होगा और उसका रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध रहेगा। इससे बिजली बिल भुगतान पहले से अधिक आसान, तेज और सुरक्षित होने की उम्मीद है। बिजली बोर्ड की योजना केवल भुगतान विकल्प बढ़ाने तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित प्रणाली के तहत बोर्ड के लिए एक यूनिफाइड वेब-आधारित डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जहां सभी डिजिटल माध्यमों से प्राप्त भुगतानों की निगरानी, मिलान और वित्तीय विश्लेषण एक ही स्थान पर किया जा सकेगा।
योग्य पेमेंट एग्रीगेटरों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए
वर्तमान में भुगतान अलग-अलग बैंकों और सेवा प्रदाताओं के माध्यम से संचालित होने के कारण बोर्ड को कई प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर यह पता लगाना आसान होगा कि भुगतान सफल हुआ या नहीं, राशि खाते में पहुंची या नहीं और किसी लेनदेन में तकनीकी त्रुटि कहां हुई। इससे शिकायतों के निपटारे और वित्तीय प्रबंधन दोनों में तेजी आएगी। बिजली बोर्ड प्रबंधन ने इस परियोजना के लिए योग्य पेमेंट एग्रीगेटरों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक संस्थाएं 6 अक्तूबर 2026 को शाम पांच बजे तक अपनी निविदाएं जमा कर सकती हैं।
तीन महीने में 30 लाख से ज्यादा डिजिटल भुगतान
हिमाचल में बिजली बिलों के डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मई से जुलाई 2026 के बीच बोर्ड को विभिन्न डिजिटल माध्यमों से 30 लाख से अधिक भुगतान प्राप्त हुए। इन लेनदेन के जरिये करीब 2027 करोड़ रुपये की राशि बोर्ड के खाते में जमा हुई। सबसे अधिक उपयोग भारत बिल पेमेंट सिस्टम का हुआ। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से तीन माह में करीब 24.96 लाख लेनदेन हुए और 298.34 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। बीबीपीएस पर पेटीएम, फोन पे, गूगल पे, अमेजन पे, भीम यूपीआई और विभिन्न बैंकिंग एप्लिकेशन के जरिये भुगतान किया जा रहा है। इसी अवधि में पेमेंट गेटवे के माध्यम से 4.28 लाख से अधिक लेनदेन हुए, जिनसे 724.11 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वहीं बड़े उपभोक्ताओं और संस्थानों ने आरटीजीएस/एनईएफटी का व्यापक उपयोग किया। इस माध्यम से केवल 46,950 लेनदेन हुए, लेकिन भुगतान राशि 1004.41 करोड़ रुपये से अधिक रही।
भुगतान का सेटलमेंट होगा और तेज
नई व्यवस्था में भुगतान निपटान की समयसीमा भी तय की गई है। आरटीजीएस और एनईएफटी से प्राप्त भुगतान का सेटलमेंट उसी दिन किया जाएगा। जबकि यूपीआई, कार्ड, बीबीपीएस और अन्य डिजिटल माध्यमों से प्राप्त राशि अधिकतम अगले कार्य दिवस तक बोर्ड के खाते में पहुंचानी होगी। इससे बोर्ड को राजस्व प्राप्ति में देरी नहीं होगी और नकदी प्रवाह की निगरानी बेहतर ढंग से हो सकेगी।