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Himachal News: मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- मेड इन हिमाचल ब्रांड एमएसएमई उत्पादों को दिलाएगा अंतरराष्ट्रीय पहचान

Sun, 04 Jan 2026 10:52 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 04 Jan 2026 10:52 AM IST
सार

शिमला के रिज पर हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 का शुभारंभ करते हुए सीएम ने कहा कि यह आयोजन ‘मेड इन हिमाचल’ ब्रांड को प्रोत्साहित करते हुए ग्रामीण, पारंपरिक एवं स्थानीय एमएसएमई उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगा। पढ़ें पूरी खबर...

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CM Sukhu said that the Made in Himachal brand will give international recognition to MSME products
हिम फेस्ट के दौरान उत्पादों की जानकारी लेते मुख्यमंत्री सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचली उत्पादों को हिम ब्रांड के नाम से प्रोत्साहित किया जाएगा। शिमला के रिज पर हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 का शुभारंभ करते हुए सीएम ने कहा कि हिम एमएसएमई फेस्ट केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नवोदित उद्यमों के लिए अवसरों का सशक्त मंच है।

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यह आयोजन ‘मेड इन हिमाचल’ ब्रांड को प्रोत्साहित करते हुए ग्रामीण, पारंपरिक एवं स्थानीय एमएसएमई उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा और निवेशकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि फेस्ट के दौरान देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधि प्रदेश में पहुंचे हैं। इससे कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों को उत्पाद वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
 
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एमएसएमई के हरितीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे प्रदूषण में कमी, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि तथा परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।  सीएम ने कहा कि बीते तीन वर्षों में दुबई, जापान और मुंबई जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में निवेशकों के साथ बैठकें आयोजित की गई हैं। इसके परिणामस्वरूप 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रतिबद्धता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 14,000 करोड़ रुपये की 683 औद्योगिक परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे लगभग 32,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

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अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम ने प्रदेश में स्टार्ट-अप, उद्योग के विकास और विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। डेवलपमेंट कमिश्नर फॉर एमएसएमई मंत्रालय डॉ. रजनीश ने प्रदेश में एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस ने फेस्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

38 स्टाॅल स्टार्टअप के ः उद्योग विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय हिम एमएसएमई फेस्ट-2026 में स्टार्टअप संचालकों के 28 स्टाॅल प्रदर्शनी में लगाए गए। फेस्ट में 52 स्टाॅल में से अधिकांश में सभी जिलों में हथकरघा पर निर्मित ऊनी शाल सहित अन्य तरह की चीजों को प्रदर्शनी में रखा गया है।

एक जिला-एक उत्पाद’ योजना पर विशेष फोकस... सुक्खू ने कहा कि आयोजन के दौरान महिला उद्यमिता और ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना पर विशेष फोकस किया जाएगा। महिला उद्यमियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संपर्क निर्माण तथा अनुभव साझा करने के अवसर उपलब्ध होंगे। सुक्खू ने विभिन्न उद्यमियों की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।

महिला उद्यमियों के साथ भी होगा संवाद सत्र 
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि महिला उद्यमियों से संवाद सत्र भी होगा। औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए  फेस्ट के दौरान ग्रीन मोबिलिटी, डिफेंस, फार्मास्यूटिकल, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, क्रत्रिम मेधा, इलैक्ट्रॉनिक चिप और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों प्राथमिकता दी जा रही है।
 

चंद्रयान-मिसाइल मिशन में एमएसएमई उत्पाद इस्तेमाल केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव आयुक्त डॉ. रजनीश ने कहा कि कृषि के बाद एमएसएमई सेक्टर सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध करवा रहा है। चंद्रयान मिशन और स्वदेशी मिसाइलों में एमएसएमई उत्पाद इस्तेमाल हो रहे हैं। हिमाचल में 2023 में एमएसएमई सेक्टर से एक लाख से कम लोग जुड़े थे। अब इनकी संख्या 1.6 करोड़ के करीब हो गई है। 

हस्तनिर्मित 4,023 शॉल की प्रदर्शनी, गिनीज बुक में नाम दर्ज
ऐतिहासिक रिज मैदान पर शनिवार को प्रदेश के कारीगरों के हाथ से बनीं 4,023 शॉल की एक साथ प्रदर्शनी लगाने पर हिमाचल प्रदेश का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान और बाजार उपलब्ध करवाने के मद्देनजर शुरू हुए तीन दिवसीय एमएसएमई फेस्ट-2026 के पहले दिन पर हिमाचल प्रदेश ने यह मुकाम हासिल किया।

लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों के इस फेस्ट में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के आधिकारिक निर्णायक स्वप्निल डांगरीकर ने सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू को इसका प्रमाणपत्र सौंपा। फेस्ट का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रम हो रहा है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनना बड़ी उपलब्धि है। यह हिमाचल के लिए गर्व बात है। इससे प्रदेश के हथकरघा उद्योग को नई पहचान मिलेगी। सीएम ने कहा कि हिमाचल की शॉल, टोपी सहित अन्य उत्पाद दुनिया में मशहूर हैं। 

इससे पूर्व शॉल प्रदर्शनी में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने एक-एक शॉल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस मौके पर शॉल बुनने के लिए इस्तेमाल होने वाली खड्डी भी प्रदर्शित की गई। उद्योग विभाग के निदेशक डॉ. यूनुस ने बताया कि हिमाचली खड्डी में बनी शॉल को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। सभी 4,023 शालें पारंपरिक हस्तनिर्मित हैं। भेड़, पश्मीना और अंगोरा की ऊन से तैयार इन शॉलों की बुनाई में 15 से 30 दिन और इससे भी अधिक का समय लगा है। 

फेस्ट में किन्नौरी, कुल्लवी और बुशहरी के अलावा अन्य खड्डी शॉलें प्रदर्शित की गई हैं। इन शॉल की खासियत पारंपरिक बॉर्डर और ज्यामितीय डिजाइन है। खड्डी में बनी शॉल न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि हजारों बुनकरों की आजीविका का भी साधन है। 
 
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