Himachal CM: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बोले- छह महीने में पूरा करें द्वारका में हिमाचल निकेतन का काम
सोमवार को नई दिल्ली के द्वारका स्थित हिमाचल निकेतन का मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दौरा कर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस भवन का निर्माण कार्य छह माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। पढ़ें पूरी खबर...
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को नई दिल्ली के द्वारका स्थित हिमाचल निकेतन का दौरा कर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 145 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस भवन में 107 कमरे, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, मल्टीपर्पज हॉल, मीटिंग हॉल, डॉर्मिटरी, पार्किंग, गार्डन, ईवी चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी।
सुक्खू ने कहा कि यह भवन उपचार, शिक्षा एवं अन्य कार्यों से राष्ट्रीय राजधानी आने वाले हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और लोगों को इस भवन में उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस भवन का निर्माण कार्य छह माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों की आवश्यकताओं के प्रति सदैव संवेदनशील रही है और लोगों को प्रदेश के बाहर हरसंभव सुविधाएं सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है।
प्रधान सचिव लोक निर्माण विभाग देवेश कुमार ने मुख्यमंत्री को परियोजना से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार, प्रमुख आवासीय आयुक्त अजय यादव, मुख्यमंत्री के ओएसडी कर्नल सेवानिवृत्त केएस बांश्टू तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी और मरीज दिल्ली आते हैं और यह भवन उन्हें सुविधाजनक एवं आरामदायक आवास उपलब्ध कराएगा।
नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल निकेतन जब बनकर तैयार होगा तो इसे ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए निजी पार्टी को दिया जा सकता है। इससे हिमाचल प्रदेश का राजस्व भी बढ़ेगा। कुछ कमरे हिमाचल प्रदेश सरकार के पास रहेंगे। हिमाचल के लोगों को दिल्ली जाना होगा तो उन्हें ठहरने के लिए कमी नहीं होगी। जिस भवन को तैयार करने में पहले पांच साल लगते थे। उसमें अब ढाई साल लग रहे हैं। यही व्यवस्था परिवर्तन भी है।