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गांव-गांव दी जाएगी बीमा योजनाओं की जानकारी

Sat, 20 Nov 2021 07:30 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Nov 2021 07:30 PM IST
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Village-village will be given information about insurance schemes
चंबा। जिले में हर फसल की बिजाई से पहले किसानों तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसी कड़ी में अभियान को गति देने के लिए उपायुक्त डीसी राणा ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के प्रचार वाहन को शनिवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि इस मौसम में रबी की फसल गेहूं और जौ का बीमा करवाने की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में किसान प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं। 25 सितंबर के बाद से लेकर अब तक जिले में 40 किसान जागरूकता शिविर लगाए जा चुके हैं।
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प्रचार वाहन को रवाना करने के बाद डीसी ने बताया कि कृषि विभाग और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी वाहन के माध्यम से 15 दिसंबर तक जिले के विभिन्न गांवों में जाकर बीमा योजना की जानकारी देंगे। पिछले रबी मौसम में जिले के 3799 किसानों गेहूं और जौ की फसल बीमा करवाया। इसके लिए किसानों ने 3.93 लाख का प्रीमियम दिया। इन फसलों में पिछले वर्ष सूखे की स्थिति से हुए नुकसान का आकलन करने के बाद यह पाया गया कि जिले में 2635 किसान फसल बीमा के तहत मुआवजे के लिए योग्य हैं।
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अब तक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की ओर से 20.81 लाख की मुआवजा राशि 2278 किसानों के बैंक खाते में जमा करवाई जा चुकी है। अन्य 357 किसानों को तीन लाख रुपये मुआवजे देने की प्रक्रिया जारी है। योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को दिया जाता है, जो किसान इसके लिए 15 दिसंबर से पहले प्रीमियम अदा करते हैं। बताया कि गेहूं की फसल का बीमा करवाने के लिए 36 रुपये प्रति बीघा की दर से प्रीमियम देना पड़ता है।
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प्राकृतिक कारणों से फसल को नुकसान हो जाए तो नुकसान का आकलन करने के बाद अधिकतम 2400 रुपये प्रति बीघा की दर से भरपाई की जाती है। इसी प्रकार जौ की फसल का बीमा करवाने के लिए 30 रुपये प्रति बीघा की दर से प्रीमियम देना पड़ता है और प्राकृतिक कारणों से फसल को नुकसान होने पर अधिकतम 2000 रुपये प्रति बीघा की दर से भरपाई की जाती है। इसलिए सभी किसान किसी भी लोकमित्र केंद्र, जन सेवा केंद्र में जाकर या सीधा पोर्टल के माध्यम से अपनी गेहूं और जौ की फसलों का बीमा करवा सकते हैं।

योजना के तहत पंजीकृत करवाने के लिए किसान को केवल अपनी एक फोटो, पहचान पत्र, खेत के खसरा नंबर का सबूत देना होता है। जबकि, ऋणी किसानों की फसल का बीमा किसान की इच्छा जानने के बाद बैंक की ओर से स्वत: ही कर दिया जाता है।
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