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मरीज की लापरवाही से मेडिकल कॉलेज के दो चिकित्सक हुए संक्रमित
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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में एक मरीज की लापरवाही से दो चिकित्सक कोरोना संक्रमित हो गए हैं। मरीज ने चिकित्सक को पहले कोरोना लक्षणों के बारे में उचित जानकारी नहीं दी। मरीज ने इस बात को भी चिकित्सकों से छिपाया कि उसके परिवार का सदस्य पहले ही कोरोना संक्रमित है और उसका उपचार डीसीएच चंबा में चल रहा है। इस दौरान चिकित्सक उसकी जांच करता रहा। इससे तीसरे दिन चिकित्सक कोरोना संक्रमित हो गई। इसी चिकित्सक के संपर्क में आने से मेडिकल कॉलेज प्राचार्य भी संक्रमित हो गए हैं। इसके बाद जब मरीज जांच की गई तो उसकी रिपोर्ट भी कोरोना संक्रमित आई।
मरीज को 19 नवंबर को मेडिकल कॉलेज के विभाग में ऑपरेशन के लिए लाया गया था। यहां पर विशेषज्ञ ने ऑपरेशन से पूर्व मरीज को एनेस्थिसिया से जांच करवाने को कहा। मरीज जब एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ से जांच करवाने पहुंचा, तो उसने वहां पर विशेषज्ञ से अपने परिवार के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी छिपाई। जुकाम के लक्षण होते हुए भी वह इससेइंकार करता रहा।
एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ ने ऑपरेशन से पूर्व बेहोशी को लेकर उसकी पूरी जांच पड़ताल की। मगर जांच के तीन दिन बाद विशेषज्ञ कोरोना संक्रमित हो गई। बाद में पता चला कि उन्होंने जिस मरीज की जांच की थी वह कोरोना संक्रमित पाया गया है। इसे उपचार के लिए डीसीएच में भर्ती किया गया। दस दिनों तक डीसीएच में उसका उपचार चला। इसके बाद वह स्वस्थ होकर घर चला गया। मगर स्वस्थ होने के बाद वह कोविड में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के बारे में गलत प्रचार करता रहा। इससे चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ का मनोबल टूटा है।
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एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ डॉ. सलोनी ने बताया कि मरीज ने परिवार के सदस्य के कोरोना संक्रमित होने की बात छिपाई। साथ में उसे जुकाम था, इसको लेकर भी वह लगातार इंकार करता रहा। इसकी वजह से वह भी संक्रमित हो गई।
हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर दिलबाग सिंह ने बताया कि कोरोना में सेवाएं देने से रोजाना चार से पांच चिकित्सक कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में मरीज स्वस्थ होने के बाद चिकित्सकों के बारे में बुरा प्रचार कर रहे हैं। इससे चिकित्सकों का मनोबल गिर रहा है।
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मरीज को 19 नवंबर को मेडिकल कॉलेज के विभाग में ऑपरेशन के लिए लाया गया था। यहां पर विशेषज्ञ ने ऑपरेशन से पूर्व मरीज को एनेस्थिसिया से जांच करवाने को कहा। मरीज जब एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ से जांच करवाने पहुंचा, तो उसने वहां पर विशेषज्ञ से अपने परिवार के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी छिपाई। जुकाम के लक्षण होते हुए भी वह इससेइंकार करता रहा।
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एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ ने ऑपरेशन से पूर्व बेहोशी को लेकर उसकी पूरी जांच पड़ताल की। मगर जांच के तीन दिन बाद विशेषज्ञ कोरोना संक्रमित हो गई। बाद में पता चला कि उन्होंने जिस मरीज की जांच की थी वह कोरोना संक्रमित पाया गया है। इसे उपचार के लिए डीसीएच में भर्ती किया गया। दस दिनों तक डीसीएच में उसका उपचार चला। इसके बाद वह स्वस्थ होकर घर चला गया। मगर स्वस्थ होने के बाद वह कोविड में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के बारे में गलत प्रचार करता रहा। इससे चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ का मनोबल टूटा है।
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एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ डॉ. सलोनी ने बताया कि मरीज ने परिवार के सदस्य के कोरोना संक्रमित होने की बात छिपाई। साथ में उसे जुकाम था, इसको लेकर भी वह लगातार इंकार करता रहा। इसकी वजह से वह भी संक्रमित हो गई।
हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर दिलबाग सिंह ने बताया कि कोरोना में सेवाएं देने से रोजाना चार से पांच चिकित्सक कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में मरीज स्वस्थ होने के बाद चिकित्सकों के बारे में बुरा प्रचार कर रहे हैं। इससे चिकित्सकों का मनोबल गिर रहा है।