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Chamba News: जान जोखिम में डालकर शिक्षक ने पार किया उफनता नाला
Mon, 25 Aug 2025 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 25 Aug 2025 11:25 PM IST
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चुराह (चंबा)। मूसलाधार बारिश में उफनते नाले-खड्डे और जगह-जगह भूस्खलन के बीच बच्चों की छुट्टी तो घोषित कर दी गई, लेकिन अध्यापकों को स्कूल पहुंचने के आदेश जारी हुए हैं। सोमवार सुबह चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत दियोला में ऐसा ही वाकया सामने आया, जब एक अध्यापक को उफनते भलेड़ नाले को छलांग लगाकर पार करना पड़ा।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस साहसिक, लेकिन खतरनाक प्रयास का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे। जानकारी के अनुसार टिकरीगढ़ निवासी यह अध्यापक सुबह 7:30 बजे घर से करीब आठ से 10 किलोमीटर पैदल सफर कर स्कूल के लिए निकला था। जसौरगढ़ स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पहुंचने के लिए उसे भलेड़ नाला पार करना पड़ा। नाले का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ था और कोई दूसरा विकल्प नहीं था। मजबूरी में उसने छलांग लगाकर नाला पार किया और किसी तरह स्कूल पहुंचा।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर अध्यापक नाले के तेज बहाव में बह जाता या कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? लोगों का सवाल यह भी है कि जब बच्चों के लिए छुट्टी घोषित है तो अध्यापकों को क्यों स्कूल बुलाया जा रहा है। वहीं, अध्यापक की हिम्मत और जिम्मेदारी की सभी सराहना कर रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
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स्थानीय ग्रामीणों ने इस साहसिक, लेकिन खतरनाक प्रयास का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे। जानकारी के अनुसार टिकरीगढ़ निवासी यह अध्यापक सुबह 7:30 बजे घर से करीब आठ से 10 किलोमीटर पैदल सफर कर स्कूल के लिए निकला था। जसौरगढ़ स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पहुंचने के लिए उसे भलेड़ नाला पार करना पड़ा। नाले का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ था और कोई दूसरा विकल्प नहीं था। मजबूरी में उसने छलांग लगाकर नाला पार किया और किसी तरह स्कूल पहुंचा।
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ग्रामीणों ने कहा कि अगर अध्यापक नाले के तेज बहाव में बह जाता या कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? लोगों का सवाल यह भी है कि जब बच्चों के लिए छुट्टी घोषित है तो अध्यापकों को क्यों स्कूल बुलाया जा रहा है। वहीं, अध्यापक की हिम्मत और जिम्मेदारी की सभी सराहना कर रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
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