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Chamba News: मन्नत पूरी हुई तो शुरू हुई जातर, पीढ़ियां बदलीं पर नहीं टूटी परंपरा
Sat, 26 Sep 2026 10:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 26 Sep 2026 10:28 PM IST
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भराड़ा में पितृ देव को समर्पित होती है अनोखी जातर, चांजू से बुलाए जाते हैं बजंतरी
संतान की इच्छा पूरी होने के बाद लिया था संकल्प, आज भी घर-घर मक्खन मांगने की रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा/चुराह। एक मन्नत पूरी हुई और उसके साथ लिया गया संकल्प पीढ़ियों तक परंपरा बन गया। चुराह घाटी के भराड़ा गांव की जातर इसी अनोखी लोक परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है।
आमतौर पर क्षेत्र की जातरें देवी-देवताओं को समर्पित होती हैं, लेकिन ग्राम पंचायत भराड़ा में होने वाली यह जातर पितृ देव को समर्पित है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में कोरोना महामारी के दौरान भी कोई व्यवधान नहीं आया।
स्थानीय बुजुर्गों किशन चंद, लब्धी राज, प्रमोद कुमार और राहुल कुमार के अनुसार गांव के शुरुआती बसने वालों में मुत्यु नामक व्यक्ति थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। उनके मित्र चांजू क्षेत्र के बजंतरी ने पारंपरिक उपाय करवाया। इसके बाद मुत्यु को संतान की प्राप्ति हुई।
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संतान होने की खुशी में मुत्यु ने बजंतरी को धन देने की इच्छा जताई, लेकिन उन्होंने एक दिन का धन लेने के बजाय नियमित रोजी-रोटी की इच्छा रखी। इसके बाद मुत्यु ने संकल्प लिया कि हर वर्ष गांव में पितृ देव के नाम पर जातर आयोजित की जाएगी और चांजू से बजंतरी तथा उनकी आने वाली पीढ़ियों को विशेष रूप से बुलाकर सम्मान दिया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार तभी से यह परंपरा लगातार चली आ रही है।
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मक्खन की रस्म आज भी कायम
जातर के दौरान चांजू से आए बजंतरी घर-घर जाकर मक्खन मांगते हैं। ग्रामीणों में मान्यता है कि जातर के दिन प्रत्येक घर से मक्खन देना शुभ माना जाता है। जातर में सैकड़ों ग्रामीण पारंपरिक चुराही परिधानों में सजकर एकत्रित होते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर सामूहिक चुराही नाटी होती है।
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संतान की इच्छा पूरी होने के बाद लिया था संकल्प, आज भी घर-घर मक्खन मांगने की रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा/चुराह। एक मन्नत पूरी हुई और उसके साथ लिया गया संकल्प पीढ़ियों तक परंपरा बन गया। चुराह घाटी के भराड़ा गांव की जातर इसी अनोखी लोक परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है।
आमतौर पर क्षेत्र की जातरें देवी-देवताओं को समर्पित होती हैं, लेकिन ग्राम पंचायत भराड़ा में होने वाली यह जातर पितृ देव को समर्पित है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में कोरोना महामारी के दौरान भी कोई व्यवधान नहीं आया।
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स्थानीय बुजुर्गों किशन चंद, लब्धी राज, प्रमोद कुमार और राहुल कुमार के अनुसार गांव के शुरुआती बसने वालों में मुत्यु नामक व्यक्ति थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। उनके मित्र चांजू क्षेत्र के बजंतरी ने पारंपरिक उपाय करवाया। इसके बाद मुत्यु को संतान की प्राप्ति हुई।
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संतान होने की खुशी में मुत्यु ने बजंतरी को धन देने की इच्छा जताई, लेकिन उन्होंने एक दिन का धन लेने के बजाय नियमित रोजी-रोटी की इच्छा रखी। इसके बाद मुत्यु ने संकल्प लिया कि हर वर्ष गांव में पितृ देव के नाम पर जातर आयोजित की जाएगी और चांजू से बजंतरी तथा उनकी आने वाली पीढ़ियों को विशेष रूप से बुलाकर सम्मान दिया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार तभी से यह परंपरा लगातार चली आ रही है।
मक्खन की रस्म आज भी कायम
जातर के दौरान चांजू से आए बजंतरी घर-घर जाकर मक्खन मांगते हैं। ग्रामीणों में मान्यता है कि जातर के दिन प्रत्येक घर से मक्खन देना शुभ माना जाता है। जातर में सैकड़ों ग्रामीण पारंपरिक चुराही परिधानों में सजकर एकत्रित होते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर सामूहिक चुराही नाटी होती है।