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मंडियों में नहीं मिल रहे बाजिव दाम, बंद किया सेब तुड़ान
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भरमौर में सेब का बगीचा।
- फोटो : Chamba
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भरमौर (चंबा)। पंजाब की मंडियों में सेब के वाजिब दाम न मिलने से भरमौर के बागवानों ने बगीचों में सेब तुड़ान रोक दिया है। रॉयल और गोल्डन सेब की दस किलोग्राम की पेटी 220 से 250 रुपये में बिक रही है। बागवानों को सेब की फसल तैयार कर उसकी लागत के अनुरूप भी दाम नहीं मिल रहे हैं। बागवानों के मुताबिक पंजाब की मंडियों में उनको प्रति पेटी सेब पर पांच रुपये तक ही मुनाफा मिल रहा है। सेब के उचित दाम न मिलने से खिन्न बागवानों ने अब सेब बगीचों में तुड़ान कार्य ही रोक दिया है।
मेहनत अनुरूप नहीं मिल रहे दाम : सुरेश
किसान सेब-फल उत्पादक संगठन भरमौर के अध्यक्ष सुरेश कुमार ठाकुर ने कहा कि बागवानों को मेहनत के अनुरूप सेब के दाम नहीं मिल रहे हैं। बाहरी मंडियों जालंधर, अमृतसर और पठानकोट में रॉयल और गोल्डन सेब की प्रति पेटी 220 से 250 रुपये में बिक रही है। नतीजतन, बागवानों की मेहनत अनुरूप पांच रुपये प्रति पेटी मुनाफा हो रहा है जो बागवानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार की ओर से बागवानों के लिए कोई राहत नहीं दी जा रही है।
बागवानों को आढ़ती लगा रहे चूना : धीरज
बागवान धीरज ठाकुर ने कहा कि सेब के उचित दाम न मिलने से बागवान चिंतित हैं। कड़ी मेहनत करने के बाद बागवान सेब की फसल को अपने खून-पसीने से सींचते हैं। बावजूद इसके मंडियों में सेब को औने-पौने दामों में खरीद कर आढ़ती उन्हें चूना लगा रहे हैं।
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नहीं मिल रहा मेहनत का फल : जैसी राम
बागवान जैसी राम ने कहा कि महंगाई के दौर में बागवान जैसे-तैसे सेब को मंडियों तक पहुंचाते हैं। वहां पर भी आढ़ती छह प्रतिशत तक अपनी कमीशन वसूल करते हैं। जबकि, बागवानों को सेब की एवज में उचित दाम मिलें या न मिलें, इससे आढ़तियों को कोई लेना-देना नहीं होता है। ऐसे में बागवानों को उनको मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है।
अधिकांश परिवार सेब फसल पर निर्भर : देस राज
बागवान देसराज शर्मा ने कहा कि सेब मंडियों में उचित दाम न मिलने से बागवानों ने बगीचों में सेब तुड़ान रोक दिया है। इससे सीधे तौर पर बागवानों को ही घाटा उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के अधिकांश परिवार सेब की फसल पर ही निर्भर हैं। बावजूद इसके दाम सही न मिलना उनकी परेशानियां बढ़ा रहे हैं।
नहीं मिल रहा कड़ी मेहनत का फल : कुंज लाल
बागवान कुंज लाल ने कहा कि बागवान कड़ी मेहनत कर फसल तैयार करता है। कई बार तो बागवानों को दिन-रात अपने बगीचों में जंगली जानवरों और पक्षियों से फसल को बचाने के लिए पहरा देना पड़ता है। कड़ी मेहनत के बावजूद उचित दाम नहीं मिल रहे हैं।
कार्टन भी मिल रहे महंगे : पवन
बागवान पवन कपूर ने कहा कि कार्टन अब 25 से 28 रुपये तक मिल रहे हैं। जबकि, पहले यही कार्टन 21 रुपये तक आसानी से मिल जाते थे। कार्टन सहित सेब पैकिंग में इस्तेमाल में लिए जाने वाले अन्य सामान के दाम भी अब बढ़ गए हैं। इससे बागवानों की जेबों पर कैंची चल रही है।
महंगाई की मार ने तोड़ी कमर : भगवान दास
बागवान भगवान दास ने कहा कि कोरोना महामारी के साथ अब महंगाई की मार ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। बागीचे से सेब तुड़ान के लिए प्रति पेटी दस रुपये प्रति मजदूर ले रहे हैं। इसके अलावा 20 रुपये प्रति पेटी पैकिंग के लिए जाते हैं। भरमौर में सेब पैकिंग के लिए रद्दी भी 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। कुल मिला कर बागवानों के सेब की एक पेटी पर 200 से 245 रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि, बागवानों को प्रति पेटी पर महज पांच रुपये ही मुनाफा हो रहा है।
बागवान रिंकेश ठाकुर का कहना है कि सेब का मंडियों में उचित दाम न मिलना बागवानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। फसल होने के बावजूद बागवानों को उचित दाम न मिलना उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है।
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मेहनत अनुरूप नहीं मिल रहे दाम : सुरेश
किसान सेब-फल उत्पादक संगठन भरमौर के अध्यक्ष सुरेश कुमार ठाकुर ने कहा कि बागवानों को मेहनत के अनुरूप सेब के दाम नहीं मिल रहे हैं। बाहरी मंडियों जालंधर, अमृतसर और पठानकोट में रॉयल और गोल्डन सेब की प्रति पेटी 220 से 250 रुपये में बिक रही है। नतीजतन, बागवानों की मेहनत अनुरूप पांच रुपये प्रति पेटी मुनाफा हो रहा है जो बागवानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार की ओर से बागवानों के लिए कोई राहत नहीं दी जा रही है।
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बागवानों को आढ़ती लगा रहे चूना : धीरज
बागवान धीरज ठाकुर ने कहा कि सेब के उचित दाम न मिलने से बागवान चिंतित हैं। कड़ी मेहनत करने के बाद बागवान सेब की फसल को अपने खून-पसीने से सींचते हैं। बावजूद इसके मंडियों में सेब को औने-पौने दामों में खरीद कर आढ़ती उन्हें चूना लगा रहे हैं।
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नहीं मिल रहा मेहनत का फल : जैसी राम
बागवान जैसी राम ने कहा कि महंगाई के दौर में बागवान जैसे-तैसे सेब को मंडियों तक पहुंचाते हैं। वहां पर भी आढ़ती छह प्रतिशत तक अपनी कमीशन वसूल करते हैं। जबकि, बागवानों को सेब की एवज में उचित दाम मिलें या न मिलें, इससे आढ़तियों को कोई लेना-देना नहीं होता है। ऐसे में बागवानों को उनको मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है।
अधिकांश परिवार सेब फसल पर निर्भर : देस राज
बागवान देसराज शर्मा ने कहा कि सेब मंडियों में उचित दाम न मिलने से बागवानों ने बगीचों में सेब तुड़ान रोक दिया है। इससे सीधे तौर पर बागवानों को ही घाटा उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के अधिकांश परिवार सेब की फसल पर ही निर्भर हैं। बावजूद इसके दाम सही न मिलना उनकी परेशानियां बढ़ा रहे हैं।
नहीं मिल रहा कड़ी मेहनत का फल : कुंज लाल
बागवान कुंज लाल ने कहा कि बागवान कड़ी मेहनत कर फसल तैयार करता है। कई बार तो बागवानों को दिन-रात अपने बगीचों में जंगली जानवरों और पक्षियों से फसल को बचाने के लिए पहरा देना पड़ता है। कड़ी मेहनत के बावजूद उचित दाम नहीं मिल रहे हैं।
कार्टन भी मिल रहे महंगे : पवन
बागवान पवन कपूर ने कहा कि कार्टन अब 25 से 28 रुपये तक मिल रहे हैं। जबकि, पहले यही कार्टन 21 रुपये तक आसानी से मिल जाते थे। कार्टन सहित सेब पैकिंग में इस्तेमाल में लिए जाने वाले अन्य सामान के दाम भी अब बढ़ गए हैं। इससे बागवानों की जेबों पर कैंची चल रही है।
महंगाई की मार ने तोड़ी कमर : भगवान दास
बागवान भगवान दास ने कहा कि कोरोना महामारी के साथ अब महंगाई की मार ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। बागीचे से सेब तुड़ान के लिए प्रति पेटी दस रुपये प्रति मजदूर ले रहे हैं। इसके अलावा 20 रुपये प्रति पेटी पैकिंग के लिए जाते हैं। भरमौर में सेब पैकिंग के लिए रद्दी भी 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। कुल मिला कर बागवानों के सेब की एक पेटी पर 200 से 245 रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि, बागवानों को प्रति पेटी पर महज पांच रुपये ही मुनाफा हो रहा है।
बागवान रिंकेश ठाकुर का कहना है कि सेब का मंडियों में उचित दाम न मिलना बागवानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। फसल होने के बावजूद बागवानों को उचित दाम न मिलना उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है।