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Chamba News: सब्सिडी बंद, बर्फबारी में बालन की खरीद पांगीवासियों की जेब पर भारी
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चंबा। बालन पर सब्सिडी खत्म होने के बाद अब पांगीवासियों को प्रति क्विंटल की एवज में 1,500 रुपये चुकता करने होंगे। प्रदेश सरकार की ओर से पांगीवासियों की सब्सिडी बंद करने से अब उनकी मुसीबतें बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि सब्सिडी के आधार पर लोगों को आधे दामों पर बालन मिलता है, लेकिन अब सब्सिडी बंद होना उनकी जेबों पर भारी पड़ रही है। जनजातीय क्षेत्र पांगी में चंबा से ट्रकों के जरिए 2280 क्विंटल बालन की खेप पहुंच चुकी है, जो धीरे-धीरे बिक्री होना भी आरंभ हो गई है।
भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश के चलते जनजातीय क्षेत्र पांगी वर्ष के छह माह तक आवाजाही के लिए बंद रहता है। बर्फबारी के चलते लोग अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। हाड कंपाने वाली ठंड से बचने के लिए ग्रामीण अपने घरों में आग जलाकर समय व्यतीत करते हैं। लिहाजा, प्रदेश सरकार द्वारा पांगी की ग्राम पंचायत किलाड़, करयास, हुडान, करेल और करयूनी पंचायत के बाशिंदों को सब्सिडी पर बालन मुहैया करवाता है। जानकारी अनुसार बीते वर्ष 2022 में 3,000 क्विंटल बालन की लकड़ी की डिमांड भेजी गई और उसी के अनुरूप बालन की खेप पांगी पहुंची थी। हालांकि पूर्व में शेष बची 4,500 क्विंटल बालन की खेप भी बेची गई।
प्रदेश सरकार की ओर से जनजातीय क्षेत्र की चुनिंदा पंचायतों के लिए प्रति क्विंटल पर 50 फीसदी अनुदान दिया जाता रहा है। इसमें बालन के ढुलान के लिए जनजातीय विभाग की ओर से 80 प्रतिशत और बालन पर 50 प्रतिशत तक जनजातीय विभाग की ओर से बजट प्रदान करवाया जाता रहा है, लेकिन सरकार की ओर से सब्सिडी बंद कर दिए जाने से अब 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बालन मिलेगा।
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वन विभाग के वन रक्षक केवल ठाकुर ने खबर की पुष्टि की है। जनजातीय क्षेत्र की चुनिंदा पंचायतों में बालन पर सब्सिडी दी जाती रही है, लेकिन अब सरकार द्वारा सब्सिडी बंद कर दी गई है। लिहाजा, 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बालन पांगीवासियों को मिलेगा।
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भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश के चलते जनजातीय क्षेत्र पांगी वर्ष के छह माह तक आवाजाही के लिए बंद रहता है। बर्फबारी के चलते लोग अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। हाड कंपाने वाली ठंड से बचने के लिए ग्रामीण अपने घरों में आग जलाकर समय व्यतीत करते हैं। लिहाजा, प्रदेश सरकार द्वारा पांगी की ग्राम पंचायत किलाड़, करयास, हुडान, करेल और करयूनी पंचायत के बाशिंदों को सब्सिडी पर बालन मुहैया करवाता है। जानकारी अनुसार बीते वर्ष 2022 में 3,000 क्विंटल बालन की लकड़ी की डिमांड भेजी गई और उसी के अनुरूप बालन की खेप पांगी पहुंची थी। हालांकि पूर्व में शेष बची 4,500 क्विंटल बालन की खेप भी बेची गई।
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प्रदेश सरकार की ओर से जनजातीय क्षेत्र की चुनिंदा पंचायतों के लिए प्रति क्विंटल पर 50 फीसदी अनुदान दिया जाता रहा है। इसमें बालन के ढुलान के लिए जनजातीय विभाग की ओर से 80 प्रतिशत और बालन पर 50 प्रतिशत तक जनजातीय विभाग की ओर से बजट प्रदान करवाया जाता रहा है, लेकिन सरकार की ओर से सब्सिडी बंद कर दिए जाने से अब 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बालन मिलेगा।
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वन विभाग के वन रक्षक केवल ठाकुर ने खबर की पुष्टि की है। जनजातीय क्षेत्र की चुनिंदा पंचायतों में बालन पर सब्सिडी दी जाती रही है, लेकिन अब सरकार द्वारा सब्सिडी बंद कर दी गई है। लिहाजा, 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बालन पांगीवासियों को मिलेगा।