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राडार से होगी लापता युवकों की तलाश
ब्यूरो, अमर उजाला (चंबा)
Updated Fri, 18 Mar 2016 03:43 PM IST
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मणिमहेश पर्वत से ठीक नीचे व धनछो से ऊपर भैरो घाटी में लापता दो युवकों की तलाश के लिए सियाचिन से हनुमंथप्पा को खोजने वाली टीम पहुंची है। इसी टीम ने हनुमंथप्पा को भी निकाला था। लापता युवकों को खोजने के लिए सेना राडार सिस्टम का प्रयोग करेगी।
सर्च ऑपरेशन के लिए सेना के दो राडार भरमौर पहुंचे हैं। सेना के रडार लगभग बीस मीटर यानी कि साठ फुट की गहराई तक भूमि के नीचे छिपी वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम हैं। हाल ही में भरमौर में बचाव दल के अस्थायी बेस कैंप पहुंचे दो रडार बर्फ और ग्लेशियर में लगभग साठ फीट नीचे तरंगों के माध्यम से दबी हुई वस्तुओं को ढूंढ निकालने में सक्षम हैं। इसके अलावा एवलांच डिटेक्टर भी इस दल को खोज अभियान में मदद कर सकते हैं।
लापता युवकों की खोज को प्रशासन ने बचाव अभियान की जगह खोज अभियान का नाम दिया है। सोमवार व मंगलवार को भी भरमौर में धूप खिली रही। लेकिन इसके बावजूद मणिमहेश में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं किया जा सका। दोनों युवकों के परिजन उनके सकुशल लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।
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दिल्ली से पहुंचे दो राडार ः एसडीएम
एसडीएम भरमौर डॉ. जितेंद्र कंवर ने बताया कि सियाचिन में हनुमंथप्पा को खोजने वाली टीम युवकों की तलाश के लिए पहुंची है। युवकों को जल्द ही खोज निकाला जाएगा। सेना के पास दो राडार दिल्ली से पहुंचे हैं। इनकी भूमि के नीचे छिपी चीज को खोजने की क्षमता 60 फीट है। इसके अलावा ऑपरेशन के लिए एवलांच डिडेक्टर की भी प्रयोग किया जा सकता है। प्रशासन और सेना सर्च ऑपरेशन के लिए तैयार है। सर्च अभियान पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर टिका हुआ है। जिस जगह युवक लापता हुए हैं। वहां की ऊंचाई समुंद्र तल से लगभग दस हजार फीट के करीब है। जहां पर भारी मात्रा में बर्फबारी हुई है। बावजूद इसके मौसम के खुलते ही सेना के जवान और प्रशासनिक टीम खोज अभियान के लिए डट जाएगी।
मौसम पर टिकी सबकी नजरें
उधर मौसम के पूर्वानुमान के बारे में जानें तो पता चलेगा कि वीरवार और शुक्रवार को फिर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश की संभावना प्रबल है। ऐसे में तकनीक पर प्रकृति भारी पड़ सकती है। फिलहाल सबकी नजरें वीरवार को शुरू होने वाले खोज अभियान पर टिकी हुई हैं।
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सर्च ऑपरेशन के लिए सेना के दो राडार भरमौर पहुंचे हैं। सेना के रडार लगभग बीस मीटर यानी कि साठ फुट की गहराई तक भूमि के नीचे छिपी वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम हैं। हाल ही में भरमौर में बचाव दल के अस्थायी बेस कैंप पहुंचे दो रडार बर्फ और ग्लेशियर में लगभग साठ फीट नीचे तरंगों के माध्यम से दबी हुई वस्तुओं को ढूंढ निकालने में सक्षम हैं। इसके अलावा एवलांच डिटेक्टर भी इस दल को खोज अभियान में मदद कर सकते हैं।
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लापता युवकों की खोज को प्रशासन ने बचाव अभियान की जगह खोज अभियान का नाम दिया है। सोमवार व मंगलवार को भी भरमौर में धूप खिली रही। लेकिन इसके बावजूद मणिमहेश में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं किया जा सका। दोनों युवकों के परिजन उनके सकुशल लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।
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दिल्ली से पहुंचे दो राडार ः एसडीएम
एसडीएम भरमौर डॉ. जितेंद्र कंवर ने बताया कि सियाचिन में हनुमंथप्पा को खोजने वाली टीम युवकों की तलाश के लिए पहुंची है। युवकों को जल्द ही खोज निकाला जाएगा। सेना के पास दो राडार दिल्ली से पहुंचे हैं। इनकी भूमि के नीचे छिपी चीज को खोजने की क्षमता 60 फीट है। इसके अलावा ऑपरेशन के लिए एवलांच डिडेक्टर की भी प्रयोग किया जा सकता है। प्रशासन और सेना सर्च ऑपरेशन के लिए तैयार है। सर्च अभियान पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर टिका हुआ है। जिस जगह युवक लापता हुए हैं। वहां की ऊंचाई समुंद्र तल से लगभग दस हजार फीट के करीब है। जहां पर भारी मात्रा में बर्फबारी हुई है। बावजूद इसके मौसम के खुलते ही सेना के जवान और प्रशासनिक टीम खोज अभियान के लिए डट जाएगी।
मौसम पर टिकी सबकी नजरें
उधर मौसम के पूर्वानुमान के बारे में जानें तो पता चलेगा कि वीरवार और शुक्रवार को फिर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश की संभावना प्रबल है। ऐसे में तकनीक पर प्रकृति भारी पड़ सकती है। फिलहाल सबकी नजरें वीरवार को शुरू होने वाले खोज अभियान पर टिकी हुई हैं।