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Chamba News: स्कूल वर्दी के लिए मिल रहे छह सौ, खर्च करने पड़ रहे 14,00 रुपये
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अभियान
स्कूल वर्दी के लिए मिल रहे छह सौ, खर्च करने पड़ रहे 14,00 रुपये
मनमाने दामों पर वर्दी खरीदने को मजबूर अभिभावक, नहीं कोई नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को हर सुविधा देने के दावे किए जाते हैं लेकिन वर्दी की खरीद अभिभावकों को काफी महंगी पड़ रही है। सरकार की ओर से अभिभावकों के खातों में महज छह सौ रुपये डाले जा रहे हैं जबकि अभिभावकों को बच्चों की वर्दी की खरीद करने के लिए 1400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके चलते सरकार की ओर से दी जा रही सौगात आफत बनती जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि दुकानों में वर्दियों के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। इस पर सरकार और प्रशासन का नियंत्रण नहीं है। अभिभावक वर्दी के नाम पर लुटने को मजबूर हैं।
सरकार की ओर से मात्र वर्दी के लिए छह सौ रुपये दिए जा रहे हैं। जबकि, बाजार में वर्दी के लिए उन्हें इससे दोगुना से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
-अरुण कुमार
जिले में इक्का-दुक्का दुकानों पर ही वर्दी और स्कूल से जुड़ा अन्य सामान मिलता है। यहां मनमानी का दौर जारी है। सरकार और प्रशासन की ओर से दरें निर्धारित नहीं की गई हैं।
-रितेश कुमार
एक तरफ सरकार बच्चों को हर सुविधा उपलब्ध करवाने के दावे करती है तो वहीं, दूसरी तरफ महज छह सौ रुपये ही दिए जा रहे हैं। पहले वर्दी निशुल्क दी जाती थी।
-शमशाद
नए शैक्षणिक सत्र के दौरान किताबों से लेकर हर सामान के दाम बढ़ जाते हैं। सबसे ज्यादा खर्च वर्दी का रहता है। सरकार की ओर से भी नाममात्र राशि दी जा रही है।
विज्ञापन
-मेहनाज बेगम
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स्कूल वर्दी के लिए मिल रहे छह सौ, खर्च करने पड़ रहे 14,00 रुपये
मनमाने दामों पर वर्दी खरीदने को मजबूर अभिभावक, नहीं कोई नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को हर सुविधा देने के दावे किए जाते हैं लेकिन वर्दी की खरीद अभिभावकों को काफी महंगी पड़ रही है। सरकार की ओर से अभिभावकों के खातों में महज छह सौ रुपये डाले जा रहे हैं जबकि अभिभावकों को बच्चों की वर्दी की खरीद करने के लिए 1400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके चलते सरकार की ओर से दी जा रही सौगात आफत बनती जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि दुकानों में वर्दियों के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। इस पर सरकार और प्रशासन का नियंत्रण नहीं है। अभिभावक वर्दी के नाम पर लुटने को मजबूर हैं।
सरकार की ओर से मात्र वर्दी के लिए छह सौ रुपये दिए जा रहे हैं। जबकि, बाजार में वर्दी के लिए उन्हें इससे दोगुना से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
-अरुण कुमार
जिले में इक्का-दुक्का दुकानों पर ही वर्दी और स्कूल से जुड़ा अन्य सामान मिलता है। यहां मनमानी का दौर जारी है। सरकार और प्रशासन की ओर से दरें निर्धारित नहीं की गई हैं।
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-रितेश कुमार
एक तरफ सरकार बच्चों को हर सुविधा उपलब्ध करवाने के दावे करती है तो वहीं, दूसरी तरफ महज छह सौ रुपये ही दिए जा रहे हैं। पहले वर्दी निशुल्क दी जाती थी।
-शमशाद
नए शैक्षणिक सत्र के दौरान किताबों से लेकर हर सामान के दाम बढ़ जाते हैं। सबसे ज्यादा खर्च वर्दी का रहता है। सरकार की ओर से भी नाममात्र राशि दी जा रही है।
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