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Chamba News: सड़क बनी सपना, बीमारी में आज भी पीठ या पालकी ही सहारा
Fri, 27 Oct 2023 10:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 27 Oct 2023 10:37 PM IST
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चंबा में चांजु पंचायत के विभिन्न गांव के विद्यार्थी पैदल स्कूल जाते।स्त्रोत:जागरूक पाठक
चांजू (चंबा)। चुराह विधानसभा क्षेत्र के आधा दर्जनों गांवों में बीमारी की हालत में सड़क तक पहुंचने के लिए पालकी ही एकमात्र सहारा है।
सड़क न होने से मरीज काे पालकी में उठाकर घने जंगल के बीच से पांच किलोमीटर का पैदल रास्ता तय कर चांजू-बघेईगढ़ सड़क तक जाना पड़ता है। विद्यार्थियों को भी 10:00 बजे स्कूल पहुंचने के लिए घरों से सुबह 6:00 बजे ही पैदल निकलना पड़ता है। बारिश के मौसम में चुराह उपमंडल की चांजू पंचायत के गांव रडू, माड़ी, सुंदरी, डिंब, भगोड़ी, फनौता, चैंजला और हणौथा आदि गांवों के बाशिंदों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। इन गांवों की आबादी 2600 के करीब है। ग्रामीणों को गृह निर्माण सामग्री और राशन खच्चरों पर ढोना पड़ता है। इसके लिए 300 से लेकर 500 रुपये प्रति खच्चर किराया देना पड़ता है।
ग्रामीणों में चेत सिंह, गोकुल, मोहल लाल, हीरा लाल, परस राम, किशोरी लाल, रंजीत कुमार, दुनी चंद और भारत आदि ने कहा कि चुनावी बेला में ही नेताओं को उनकी याद आती है। वोट मिलने के बाद कोई लोगों का हाल-चाल पूछने तक नहीं आता। उन्होंने कहा कि आज भी क्षेत्र के बच्चे प्राथमिक और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए पांच किलोमीटर का कठिन और जंगल के रास्ते से होकर चांजू-बघेईगढ़ तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने दोटूक कहा कि लोकसभा चुनाव से पूर्व उनके गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए प्रयास शुरू नहीं किए गए तो वे चुनावों का बहिष्कार करेंगे।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंदर शर्मा ने बताया कि लोग अपनी जमीनें देते हैं तो उसके बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस का केस बनाकर स्वीकृति के बाद सड़क निर्माण के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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विधायक हंसराज ने कहा कि चुराह में पिछले पांच वर्षो में 246 सड़कें बनाई गई हैं। चांजू पंचायत के गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए दियोला पंचायत से शुरुआत की गई थी। इससे आगे फॉरेस्ट क्लीयरेंस की दिक्कत आई है। विधायक प्राथमिकता में सड़क डाली गई है। कांग्रेस के कार्यकाल में विकास कार्य लटककर रह गए हैं। कांग्रेसी प्रत्याशी यशवंत खन्ना ने बताया कि सड़क से अछूते गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए वह जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर मांग उठाएंगे।
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सड़क न होने से मरीज काे पालकी में उठाकर घने जंगल के बीच से पांच किलोमीटर का पैदल रास्ता तय कर चांजू-बघेईगढ़ सड़क तक जाना पड़ता है। विद्यार्थियों को भी 10:00 बजे स्कूल पहुंचने के लिए घरों से सुबह 6:00 बजे ही पैदल निकलना पड़ता है। बारिश के मौसम में चुराह उपमंडल की चांजू पंचायत के गांव रडू, माड़ी, सुंदरी, डिंब, भगोड़ी, फनौता, चैंजला और हणौथा आदि गांवों के बाशिंदों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। इन गांवों की आबादी 2600 के करीब है। ग्रामीणों को गृह निर्माण सामग्री और राशन खच्चरों पर ढोना पड़ता है। इसके लिए 300 से लेकर 500 रुपये प्रति खच्चर किराया देना पड़ता है।
ग्रामीणों में चेत सिंह, गोकुल, मोहल लाल, हीरा लाल, परस राम, किशोरी लाल, रंजीत कुमार, दुनी चंद और भारत आदि ने कहा कि चुनावी बेला में ही नेताओं को उनकी याद आती है। वोट मिलने के बाद कोई लोगों का हाल-चाल पूछने तक नहीं आता। उन्होंने कहा कि आज भी क्षेत्र के बच्चे प्राथमिक और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए पांच किलोमीटर का कठिन और जंगल के रास्ते से होकर चांजू-बघेईगढ़ तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने दोटूक कहा कि लोकसभा चुनाव से पूर्व उनके गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए प्रयास शुरू नहीं किए गए तो वे चुनावों का बहिष्कार करेंगे।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंदर शर्मा ने बताया कि लोग अपनी जमीनें देते हैं तो उसके बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस का केस बनाकर स्वीकृति के बाद सड़क निर्माण के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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विधायक हंसराज ने कहा कि चुराह में पिछले पांच वर्षो में 246 सड़कें बनाई गई हैं। चांजू पंचायत के गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए दियोला पंचायत से शुरुआत की गई थी। इससे आगे फॉरेस्ट क्लीयरेंस की दिक्कत आई है। विधायक प्राथमिकता में सड़क डाली गई है। कांग्रेस के कार्यकाल में विकास कार्य लटककर रह गए हैं। कांग्रेसी प्रत्याशी यशवंत खन्ना ने बताया कि सड़क से अछूते गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए वह जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर मांग उठाएंगे।