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Chamba News: बच्चों की वर्दी और जूतों पर महंगाई की मार
Mon, 13 Apr 2026 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 13 Apr 2026 10:55 PM IST
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अभिभावकों की जेब पर चल रही कैंची, अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे 100 रुपये
बाजार में किताबों, वर्दी और जूतों की दुकानों पर उमड़ रही खरीदारों की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सालाना परीक्षाएं उत्तीर्ण कर नई कक्षाओं में पहुंचे बच्चों की वर्दी और जूतों पर महंगाई की मार देखी जा रही है। बच्चों को वर्दी, जूते खरीदने के लिए दुकानों में पहुंचने वाले अभिभावकों की जेबों पर खूब कैंची चल रही है।
अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए जूते खरीदने के लिए 50 से लेकर 100 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। अभिभावकों के मुताबिक वर्दी, किताबों समेत जूतों में भी 50 से लेकर 100 रुपये की बढ़ोतरी ने उनका बजट बिगाड़ दिया है। बाजारों में किताबों, वर्दी और जूतों की दुकानों में अभिभावकों की भीड़ देखने को मिल रही है। अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है कि स्कूलों के सामान में बढ़ोतरी कर उनकी जेबों पर कैंची न चलाई जाए।
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महंगाई की मार से स्कूली वर्दी, किताबें और जूते भी नहीं बच पाए हैं। स्कूली बच्चों के सामान में बढ़ोतरी होने से अभिभावकों की जेब पर कैंची चल रही हैं। - मीनाक्षी
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अभिभावकों को अपने बच्चों को जूते खरीदने के लिए इस बार 50-100 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। आगामी कक्षा में पहुंचने पर फिर से उन पर स्कूली सामान को लेकर बोझ पड़ रहा है। - रवीना
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स्कूल प्रबंधनों की मनमानी कहें या शिक्षा विभाग के बेरुखी। अभिभावक बच्चों को पढ़ाने के चक्कर में लुट रहे हैं। सरकार और अधिकारियों को इससे कोई लेना-देना नहीं है। - मेहनाज
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महंगाई की मार से अब शिक्षा भी अछूती नहीं रही है। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों के सामान के दाम में की गई बढ़ोतरी को रोकने के प्रयास किए जाएं। - दामिनी
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बाजार में किताबों, वर्दी और जूतों की दुकानों पर उमड़ रही खरीदारों की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सालाना परीक्षाएं उत्तीर्ण कर नई कक्षाओं में पहुंचे बच्चों की वर्दी और जूतों पर महंगाई की मार देखी जा रही है। बच्चों को वर्दी, जूते खरीदने के लिए दुकानों में पहुंचने वाले अभिभावकों की जेबों पर खूब कैंची चल रही है।
अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए जूते खरीदने के लिए 50 से लेकर 100 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। अभिभावकों के मुताबिक वर्दी, किताबों समेत जूतों में भी 50 से लेकर 100 रुपये की बढ़ोतरी ने उनका बजट बिगाड़ दिया है। बाजारों में किताबों, वर्दी और जूतों की दुकानों में अभिभावकों की भीड़ देखने को मिल रही है। अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है कि स्कूलों के सामान में बढ़ोतरी कर उनकी जेबों पर कैंची न चलाई जाए।
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महंगाई की मार से स्कूली वर्दी, किताबें और जूते भी नहीं बच पाए हैं। स्कूली बच्चों के सामान में बढ़ोतरी होने से अभिभावकों की जेब पर कैंची चल रही हैं। - मीनाक्षी
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अभिभावकों को अपने बच्चों को जूते खरीदने के लिए इस बार 50-100 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। आगामी कक्षा में पहुंचने पर फिर से उन पर स्कूली सामान को लेकर बोझ पड़ रहा है। - रवीना
स्कूल प्रबंधनों की मनमानी कहें या शिक्षा विभाग के बेरुखी। अभिभावक बच्चों को पढ़ाने के चक्कर में लुट रहे हैं। सरकार और अधिकारियों को इससे कोई लेना-देना नहीं है। - मेहनाज
महंगाई की मार से अब शिक्षा भी अछूती नहीं रही है। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों के सामान के दाम में की गई बढ़ोतरी को रोकने के प्रयास किए जाएं। - दामिनी