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Chamba News: चुराह क्षेत्र में सड़क किनारे फिर लगे कशमल की जड़ों के ढेर
Mon, 08 Jan 2024 10:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 08 Jan 2024 10:54 PM IST
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चंबा के चुराह क्षेत्र में उखाड़ी गई कसमल की जड़े।स्वंाद
चुराह (चंबा)। चुराह उपमंडल में वन भूमि से कशमल की जड़ें उखाड़ने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। ग्रामीणों की चरागाहें तबाह हो रही हैं।
इससे मवेशी पालकों समेत भेड़पालकों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वन भूमि से कशमल की जड़ें उखाड़ने से मिट्टी की पकड़ ढीली होने से बारिश होने पर भूस्खलन का खतरा भी पैदा हो गया है। विभाग की सख्ती के चलते कुछ दिन तक यह कार्य बंद रहा था। वन विभाग की कड़ी निगरानी के बाद निजी भूमि से कशमल निकालने पर रोक लगती नजर आ रही है, लेकिन अज्ञात लोग अब वन विभाग की भूमि को निशाना बना रहे हैं। वहीं, सेईकोठी से सनवाल तक सड़क किनारे जगह-जगह कशमल की जड़ों के ढेर लगाए गए हैं। यहां से रोजाना 5 से 6 गाड़ियां बाहरी राज्यों के लिए भेजी जा रही हैं।
चुराह के सेईकोठी, प्रतिमास, देहग्रा, हरतवास, हियाड़, शक्तिनाला, ब्रुइला, सनवाल, नरवाड़ नाला, शनेड़ा नाला समेत जगह-जगह कशमल की जड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार ठेकेदार लोगों से 12 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कशमल की जड़ें खरीद रहे हैं। हालांकि, वन विभाग की कार्रवाई के बाद कुछ दिन तक यह कार्य बंद रहा, लेकिन अब फिर से लोगों ने कशमल की जड़ें निकालनी शुरू कर दी हैं। लोग निजी के बजाय वन विभाग की भूमि से कशमल की जड़ें निकाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों के पास 31 मार्च 2024 तक कशमल की जड़ें निकालने का लाइसेंस है। ऐसे में वन विभाग की कार्रवाई भी असफल होती प्रतीत हो रही है।
उधर, डीएफओ सलूणी सुशील गुलेरिया ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। बिना अनुमति के कशमल की जड़ें निकालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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इससे मवेशी पालकों समेत भेड़पालकों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वन भूमि से कशमल की जड़ें उखाड़ने से मिट्टी की पकड़ ढीली होने से बारिश होने पर भूस्खलन का खतरा भी पैदा हो गया है। विभाग की सख्ती के चलते कुछ दिन तक यह कार्य बंद रहा था। वन विभाग की कड़ी निगरानी के बाद निजी भूमि से कशमल निकालने पर रोक लगती नजर आ रही है, लेकिन अज्ञात लोग अब वन विभाग की भूमि को निशाना बना रहे हैं। वहीं, सेईकोठी से सनवाल तक सड़क किनारे जगह-जगह कशमल की जड़ों के ढेर लगाए गए हैं। यहां से रोजाना 5 से 6 गाड़ियां बाहरी राज्यों के लिए भेजी जा रही हैं।
चुराह के सेईकोठी, प्रतिमास, देहग्रा, हरतवास, हियाड़, शक्तिनाला, ब्रुइला, सनवाल, नरवाड़ नाला, शनेड़ा नाला समेत जगह-जगह कशमल की जड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार ठेकेदार लोगों से 12 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कशमल की जड़ें खरीद रहे हैं। हालांकि, वन विभाग की कार्रवाई के बाद कुछ दिन तक यह कार्य बंद रहा, लेकिन अब फिर से लोगों ने कशमल की जड़ें निकालनी शुरू कर दी हैं। लोग निजी के बजाय वन विभाग की भूमि से कशमल की जड़ें निकाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों के पास 31 मार्च 2024 तक कशमल की जड़ें निकालने का लाइसेंस है। ऐसे में वन विभाग की कार्रवाई भी असफल होती प्रतीत हो रही है।
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उधर, डीएफओ सलूणी सुशील गुलेरिया ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। बिना अनुमति के कशमल की जड़ें निकालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।