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Chamba News: विकास अधिकारी की 27.68 लाख की जमा वापसी याचिका खारिज
Mon, 27 Jul 2026 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:55 PM IST
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग धर्मशाला-चंबा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग धर्मशाला-चंबा ने अर्थ कोष निधि लिमिटेड और अर्थ संचय निधि लिमिटेड के खिलाफ दायर 27.68 लाख रुपये की परिपक्व जमा राशि लौटाने संबंधी शिकायत को खारिज कर दिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता कंपनी का विकास अधिकारी था, उपभोक्ता नहीं। इसलिए उसकी शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता जय राम निवासी गांव डांड ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2017 से 2023 के बीच कंपनी के लिए ग्रामीणों, रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से 31 एफडी और आरडी खाते खुलवाए थे। इन खातों में 27,68,300 रुपये जमा कराए गए। इनकी परिपक्वता के बाद भी भुगतान नहीं किया गया।
शिकायत में मूलधन और ब्याज के अलावा मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में एक-एक 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान दोनों कंपनियों ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को वाद दायर करने का अधिकार नहीं है। वह संबंधित कंपनियों का उपभोक्ता नहीं है। आयोग ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए माना कि शिकायतकर्ता स्वयं कंपनी में विकास अधिकारी के रूप में कार्यरत था और उसने किसी सेवा के बदले प्रतिफल देकर उपभोक्ता का दर्जा प्राप्त नहीं किया। ऐसे में वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायतकर्ता की परिभाषा में नहीं आता। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत बिना किसी लागत के खारिज कर दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग धर्मशाला-चंबा ने अर्थ कोष निधि लिमिटेड और अर्थ संचय निधि लिमिटेड के खिलाफ दायर 27.68 लाख रुपये की परिपक्व जमा राशि लौटाने संबंधी शिकायत को खारिज कर दिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता कंपनी का विकास अधिकारी था, उपभोक्ता नहीं। इसलिए उसकी शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता जय राम निवासी गांव डांड ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2017 से 2023 के बीच कंपनी के लिए ग्रामीणों, रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से 31 एफडी और आरडी खाते खुलवाए थे। इन खातों में 27,68,300 रुपये जमा कराए गए। इनकी परिपक्वता के बाद भी भुगतान नहीं किया गया।
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शिकायत में मूलधन और ब्याज के अलावा मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में एक-एक 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान दोनों कंपनियों ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को वाद दायर करने का अधिकार नहीं है। वह संबंधित कंपनियों का उपभोक्ता नहीं है। आयोग ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए माना कि शिकायतकर्ता स्वयं कंपनी में विकास अधिकारी के रूप में कार्यरत था और उसने किसी सेवा के बदले प्रतिफल देकर उपभोक्ता का दर्जा प्राप्त नहीं किया। ऐसे में वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायतकर्ता की परिभाषा में नहीं आता। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत बिना किसी लागत के खारिज कर दी।
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