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मेडिकल कॉलेज सहित जिले के 57 स्वास्थ्य संस्थानों में दो घंटे ओपीडी रही बंद
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डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज चंबा में ओपीडी के बाहर परेशान बैठी महिला मरीज।
- फोटो : Chamba
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चंबा। चंबा मेडिकल कॉलेज सहित जिले के 57 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी में सुबह दो घंटे मरीजों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हुई। सभी चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर पेनडाउन हड़ताल पर रहे। सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर साढ़े ग्यारह बजे तक ओपीडी के बाहर मरीज डॉक्टर का इंतजार करते रहे लेकिन, डॉक्टर पेनडाउन हड़ताल करने के उपरांत ओपीडी में पहुंचे।
मेडिकल कॉलेज की शिशु, महिला, नेत्र और महिला ओपीडी के बाहर तीमारदार अपने मरीजों को लेकर सुबह पहुंच गए। कई मरीजों को डॉक्टरों की हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी। इसके चलते वे ओपीडी के बाहर रूटीन की तरह लाइनों में खड़े हो गए। लेकिन, जब दस बजे तक कोई चिकित्सक ओपीडी में नहीं पहुंचा तो उन्होंने प्रबंधन को फोन करना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल पर हैं। इसके बाद मरीज और तीमारदार ओपीडी के बाहर खाली स्थान पर चिकित्सक के आने के इंतजार में बैठ गए। साढ़े ग्यारह बजे जैसे ही चिकित्सक अपनी ओपीडी में पहुंचे तो मरीजों में जल्दी जांच करवाने को लेकर आपस में धक्का-मुक्की बढ़ गई। निजी सुरक्षा कर्मियों के लिए भी मरीजों को संभालना मुश्किल रहा।
वहीं, मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष में ड्यूटी देने वाले चिकित्सक रूटीन की तरह वहां तैनात रहे। इसकी वजह से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। वहीं, डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जातीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल में फैकल्टी एसोसिएशन और मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन मिलकर विरोध कर रही हैं। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर दिलबाग सिंह ने बताया कि डॉक्टर सरकार से मांग कर रहे हैं कि पंजाब की तर्ज पर हिमाचल में चिकित्सकों को वेतन दिया जाए। कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों ने लोगों की जान बचाने का काम किया है। अभी भी डॉक्टर कोविड में अपनी नियमित ड्यूटी दे रहे हैं। कहा कि सरकार ने जल्द उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया तो राज्य स्तर पर एसोसिएशन के फैसले को जिले में भी अमल किया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज की शिशु, महिला, नेत्र और महिला ओपीडी के बाहर तीमारदार अपने मरीजों को लेकर सुबह पहुंच गए। कई मरीजों को डॉक्टरों की हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी। इसके चलते वे ओपीडी के बाहर रूटीन की तरह लाइनों में खड़े हो गए। लेकिन, जब दस बजे तक कोई चिकित्सक ओपीडी में नहीं पहुंचा तो उन्होंने प्रबंधन को फोन करना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल पर हैं। इसके बाद मरीज और तीमारदार ओपीडी के बाहर खाली स्थान पर चिकित्सक के आने के इंतजार में बैठ गए। साढ़े ग्यारह बजे जैसे ही चिकित्सक अपनी ओपीडी में पहुंचे तो मरीजों में जल्दी जांच करवाने को लेकर आपस में धक्का-मुक्की बढ़ गई। निजी सुरक्षा कर्मियों के लिए भी मरीजों को संभालना मुश्किल रहा।
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वहीं, मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष में ड्यूटी देने वाले चिकित्सक रूटीन की तरह वहां तैनात रहे। इसकी वजह से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। वहीं, डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जातीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल में फैकल्टी एसोसिएशन और मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन मिलकर विरोध कर रही हैं। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर दिलबाग सिंह ने बताया कि डॉक्टर सरकार से मांग कर रहे हैं कि पंजाब की तर्ज पर हिमाचल में चिकित्सकों को वेतन दिया जाए। कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों ने लोगों की जान बचाने का काम किया है। अभी भी डॉक्टर कोविड में अपनी नियमित ड्यूटी दे रहे हैं। कहा कि सरकार ने जल्द उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया तो राज्य स्तर पर एसोसिएशन के फैसले को जिले में भी अमल किया जाएगा।
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