{"_id":"5f64d98b8ebc3e982825d3cf","slug":"outsource-employes-angry-chamba-news-sml345526430","type":"story","status":"publish","title_hn":"आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने कंपनी पर प्रताड़ित करने के आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने कंपनी पर प्रताड़ित करने के आरोप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंबा। चंबा मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसको लेकर आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ सरकार, जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन व श्रम विभाग में अपनी शिकायतें दे चुका है लेकिन उनकी समस्या का किसी ने भी समाधान नहीं किया। यह बात आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के प्रधान जीआर वर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी मनमर्जी से आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन दे रही है। दो महीने होने पर एक महीने का वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों को अभी तक ईएसआई नंबर भी नहीं दिया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन हरेक माह समय पर कंपनी को कर्मचारियों के वेतन का भुगतान कर देता है। कंपनी अपनी मर्जी मुताबिक कर्मचारियों को वेतन देती है।
जीआर वर्मा ने कहा कि कोरोना काल में आउटसोर्स कर्मचारियों ने मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों में पूरी ईमानदारी के साथ ड्यूटी निभाई लेकिन उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया गया। कई कर्मचारी क्वार्टर लेकर रह रहे हैं। उन्हें किराया देना मुश्किल हो रहा है। कंपनी ने श्रम विभाग को लिखित रूप में दिया है कि उनका टेंडर वर्ष 2018 में खत्म हो चुका है। उसके बाद कंपनी का टेंडर रिन्यू नहीं हुआ है तो किस आधार पर कॉलेज प्रबंधन कंपनी को हरेक माह लाखों रुपये का भुगतान कर रहा है। दो सालों से बिना टेंडर कंपनी कर्मचारियों के साथ दादागिरी कर रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रिंसिपल कार्यालय के ऑर्डर दर्शाकर बदला जा रहा है। ऑर्डर पर कंपनी की मोहर लगी होती है। समय रहते कंपनी की मनमानी बंद न की गई तो महासंघ आगामी रणनीति तैयार करेगा।
विज्ञापन
जीआर वर्मा ने कहा कि कोरोना काल में आउटसोर्स कर्मचारियों ने मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों में पूरी ईमानदारी के साथ ड्यूटी निभाई लेकिन उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया गया। कई कर्मचारी क्वार्टर लेकर रह रहे हैं। उन्हें किराया देना मुश्किल हो रहा है। कंपनी ने श्रम विभाग को लिखित रूप में दिया है कि उनका टेंडर वर्ष 2018 में खत्म हो चुका है। उसके बाद कंपनी का टेंडर रिन्यू नहीं हुआ है तो किस आधार पर कॉलेज प्रबंधन कंपनी को हरेक माह लाखों रुपये का भुगतान कर रहा है। दो सालों से बिना टेंडर कंपनी कर्मचारियों के साथ दादागिरी कर रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रिंसिपल कार्यालय के ऑर्डर दर्शाकर बदला जा रहा है। ऑर्डर पर कंपनी की मोहर लगी होती है। समय रहते कंपनी की मनमानी बंद न की गई तो महासंघ आगामी रणनीति तैयार करेगा।
विज्ञापन