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चम्बा: शुक्राह स्कूल में छह कक्षाओं को पढ़ा रहा मात्र एक शिक्षक
Mon, 20 Feb 2023 03:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 20 Feb 2023 03:54 PM IST
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सलूणी (चंबा)। उपमंडल सलूणी की राजकीय प्राथमिक पाठशाला शुक्राह में नर्सरी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के 50 विद्यार्थियों की शिक्षा का जिम्मा एक अध्यापक पर है। अध्यापक को विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ ही विद्यालय के कागजी कार्य भी निपटाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि स्कूल के कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। इस कारण अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
शुक्राह स्कूल में एकमात्र अध्यापक को बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल के जरूरी काम भी संभालने पड़ रहे हैं। अगर स्कूल के अन्य कार्य के सिलसिले में कहीं बाहर जाना पड़े तो स्कूल में ताला लगाने की नौबत आ सकती है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। अभिभावक अध्यापक के रिक्त पदों को भरने के बारे में कई बार सरकार और विभाग से मांग कर चुके है। बावजूद इसके समस्या बरकरार है।
अभिभावकों में रमेश कुमार, तानी राम, संजय कुमार, परविंद्र कुमार, राजेश कुमार और सुरेश कुमार ने बताया कि स्कूल में एक अध्यापक के साथ नर्सरी अध्यापक का पद पिछले दो साल से खाली पड़ा है। लंबे समय से रिक्त पदों के न भरे जाने से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोच रही है। स्कूल में दूर-दराज गांवों से बच्चे शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं, लेकिन अध्यापकों की कमी के चलते बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे है।
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विभाग के उच्चाधिकारी को पाठशाला में अध्यापकों की कमी के बारे में अवगत करवा दिया गया है। अध्यापकों की नियुक्ति होने की उम्मीद है। इससे बच्चों की पढ़ाई निर्बाध चलती रहेगी।
-जगदीश शर्मा,
खंड शिक्षा अधिकारी, सलूणी
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शुक्राह स्कूल में एकमात्र अध्यापक को बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल के जरूरी काम भी संभालने पड़ रहे हैं। अगर स्कूल के अन्य कार्य के सिलसिले में कहीं बाहर जाना पड़े तो स्कूल में ताला लगाने की नौबत आ सकती है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। अभिभावक अध्यापक के रिक्त पदों को भरने के बारे में कई बार सरकार और विभाग से मांग कर चुके है। बावजूद इसके समस्या बरकरार है।
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अभिभावकों में रमेश कुमार, तानी राम, संजय कुमार, परविंद्र कुमार, राजेश कुमार और सुरेश कुमार ने बताया कि स्कूल में एक अध्यापक के साथ नर्सरी अध्यापक का पद पिछले दो साल से खाली पड़ा है। लंबे समय से रिक्त पदों के न भरे जाने से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोच रही है। स्कूल में दूर-दराज गांवों से बच्चे शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं, लेकिन अध्यापकों की कमी के चलते बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे है।
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विभाग के उच्चाधिकारी को पाठशाला में अध्यापकों की कमी के बारे में अवगत करवा दिया गया है। अध्यापकों की नियुक्ति होने की उम्मीद है। इससे बच्चों की पढ़ाई निर्बाध चलती रहेगी।
-जगदीश शर्मा,
खंड शिक्षा अधिकारी, सलूणी