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अब एमएस की निगरानी में रहेगा ऑपरेशन का सामान
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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में अब हिमकेयर और आयुष्मान कार्ड धारकों को बाजार से ऑपरेशन संबंधी सामान नहीं खरीदना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से स्वास्थ्य महकमे को पत्र लिख कर ई-टेंडरिंग के जरिये ऑपरेशन का सामान कंपनी की ओर से चिकित्सा अधीक्षक की निगरानी में रखने की बात कही गई है जिससे किसी भी कार्ड धारक मरीज को बाजार से सामान न खरीदना पड़े। हिमकेयर कार्ड का मरीज को लाभ न मिलने के मामले में जांच के लिए गठित की गई पांच सदस्यीय टीम की रिपोर्ट के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने यह निर्णय किया है।
गौरतलब है कि हिमकेयर कार्ड का मरीज को लाभ न मिलने से नाराज रजिंडू निवासी नारायण ने सदर विधायक को अपना दुखड़ा सुनाया। इसके बाद विधायक ने मेडिकल कॉलेज चंबा परिसर में पहुंचकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और प्रभावित से पैसे ऐंठने वालों पर नकेल कसने के निर्देश जारी किए। पीड़ित ने बताया कि तीन माह पूर्व उसके 20 वर्षीय बेटे हेमराज की वाहन दुर्घटना में टांग फ्रेक्चर हो गई। आपातकालीन कक्ष में चिकित्सक ने तुरंत मरीज का ऑपरेशन करने की बात कही। ऐसे में वहां पर बैठे एक व्यक्ति ने प्लेट डालने के नाम पर उनसे 25 हजार रुपये और बाद में फिर से दवाइयों सहित अन्य सामान लाने पर उससे दस हजार रुपये वसूले। इसके बाद वह बिल के रूप में पांच हजार रुपये और मांगने लगा। इससे खिन्न होकर प्रभावित ने सदर विधायक को दुखड़ा सुना और वह मौके पर पहुंचे।
इसी मामले को लेकर गठित की गई पांच सदस्यों की कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज चंबा के प्राचार्य को सौंपी। इसमें बताया गया कि ऑपरेशन के लिए लाए गए युवक की गंभीर हालत को देखते हुए ऑपरेशन हुआ। मौके पर परिजन कोई कार्ड नहीं दिखा पाए लिहाजा वे बाजार से सामान खरीद कर लाए। रिपोर्ट में बताया गया है कि दवा विक्रेता का 29 जनवरी 2020 को सरकार के साथ दवाइयों और ऑपरेशन उपकरण बेचने संबंधी एमओयू साइन हुआ है। कंपनी का कर्मी ओटी में ऑपरेशन संबंधी उपकरण लेकर पहुंचते हैं।
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ऑपरेशन के बाद उपकरणों को वापस ले जाते हैं। मरीज के परिजनों की ओर से पांच हजार शेष बिल को लेकर बवाल हुआ है। बहरहाल इसी के चलते सरकार को पत्र लिख कमेटी ने ई-टेंडरिंग की बात कही है।
मेडिकल कॉलेज चंबा के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट में साफ हुआ है कि चिकित्सक का दवा विक्रेता के साथ कोई लेना-देना नहीं है। समय पर कार्ड उपलब्ध न करवाने के कारण उन्हें ऑपरेशन का सामान बाजार से खरीदना पड़ा।
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गौरतलब है कि हिमकेयर कार्ड का मरीज को लाभ न मिलने से नाराज रजिंडू निवासी नारायण ने सदर विधायक को अपना दुखड़ा सुनाया। इसके बाद विधायक ने मेडिकल कॉलेज चंबा परिसर में पहुंचकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और प्रभावित से पैसे ऐंठने वालों पर नकेल कसने के निर्देश जारी किए। पीड़ित ने बताया कि तीन माह पूर्व उसके 20 वर्षीय बेटे हेमराज की वाहन दुर्घटना में टांग फ्रेक्चर हो गई। आपातकालीन कक्ष में चिकित्सक ने तुरंत मरीज का ऑपरेशन करने की बात कही। ऐसे में वहां पर बैठे एक व्यक्ति ने प्लेट डालने के नाम पर उनसे 25 हजार रुपये और बाद में फिर से दवाइयों सहित अन्य सामान लाने पर उससे दस हजार रुपये वसूले। इसके बाद वह बिल के रूप में पांच हजार रुपये और मांगने लगा। इससे खिन्न होकर प्रभावित ने सदर विधायक को दुखड़ा सुना और वह मौके पर पहुंचे।
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इसी मामले को लेकर गठित की गई पांच सदस्यों की कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज चंबा के प्राचार्य को सौंपी। इसमें बताया गया कि ऑपरेशन के लिए लाए गए युवक की गंभीर हालत को देखते हुए ऑपरेशन हुआ। मौके पर परिजन कोई कार्ड नहीं दिखा पाए लिहाजा वे बाजार से सामान खरीद कर लाए। रिपोर्ट में बताया गया है कि दवा विक्रेता का 29 जनवरी 2020 को सरकार के साथ दवाइयों और ऑपरेशन उपकरण बेचने संबंधी एमओयू साइन हुआ है। कंपनी का कर्मी ओटी में ऑपरेशन संबंधी उपकरण लेकर पहुंचते हैं।
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ऑपरेशन के बाद उपकरणों को वापस ले जाते हैं। मरीज के परिजनों की ओर से पांच हजार शेष बिल को लेकर बवाल हुआ है। बहरहाल इसी के चलते सरकार को पत्र लिख कमेटी ने ई-टेंडरिंग की बात कही है।
मेडिकल कॉलेज चंबा के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट में साफ हुआ है कि चिकित्सक का दवा विक्रेता के साथ कोई लेना-देना नहीं है। समय पर कार्ड उपलब्ध न करवाने के कारण उन्हें ऑपरेशन का सामान बाजार से खरीदना पड़ा।