{"_id":"576d64ee4f1c1bc525b49697","slug":"no-permanent-dan-patra-in-manimahesh-yatra","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौरासी परिसर में पांच मंदिरों के गर्भगृह में नहीं लगेंगे स्थायी दानपात्रकंद च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चौरासी परिसर में पांच मंदिरों के गर्भगृह में नहीं लगेंगे स्थायी दानपात्रकंद च
अमर उजाला चंबा
Updated Fri, 24 Jun 2016 10:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौरासी परिसर में मंदिर के भीतर ट्रस्ट के स्थायी तौर पर दानपात्र नहीं लग पाएंगे। इसके अलावा पुरातत्व विभाग ने दानपात्र का साइज भी छोटा करने के बाद ही इसे मंदिर के अंदर रखने की बात स्वीकार की है।
चौरासी परिसर में पुरातत्व विभाग के माध्यम से स्थापित किए गए सभी दानपात्रों को जमीन पर रखने की बात पुरातत्व विभाग ने मणिमहेश ट्रस्ट के समक्ष रखी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इस कड़ी में शुक्रवार को ट्रस्ट के अध्यक्ष एडीएम भरमौर विनय धीमान और पुरातत्व विभाग के अधीक्षक टीएल मीणा ने चौरासी परिसर का मुआयना किया। गौरतलब है कि चौरासी परिसर में मणिमहेश मंदिर, लखना माता मंदिर, गणेश मंदिर, नरसिंह भगवान मंदिर और नंदी मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन आते हैं। इन मंदिरों में कोई भी बदलाव पुरातत्व विभाग की इजाजत के बिना नहीं किया जा सकता है। पिछले साल ट्रस्ट ने चौरासी परिसर में दानपात्र स्थापित किए थे ताकि मणिमहेश यात्रा के दौरान ट्रस्ट को आय हो सके, लेकिन इन दानपात्रों का आकार बड़ा होने की वजह से इन्हें स्थापित करने को लेकर मंदिर पुजारियों और ट्रस्ट के बीच विरोध उत्पन्न हो गया था, लेकिन इस बार ट्रस्ट ने इन दानपात्रों को स्थायी तौर पर स्थापित करने की मुहिम छेड़ी है, जबकि मंदिर के गर्भगृह में छोटे दानपात्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए पुरातत्व विभाग के साथ ट्रस्ट के अध्यक्ष एडीएम भरमौर की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन भी किया गया है। इस मौके पर टीएल मीणा, सर्वेयर अशोक कौंडल सहित अन्य उपस्थित थे।
जमीन पर लगाएंगे दानपात्र : एडीएम
एडीएम भरमौर विनय धीमान ने बताया कि मंदिर के बाहर सभी दानपात्र जमीन पर स्थापित होंगे। ताकि मंदिर की शोभा खराब न हो और गर्भगृह में छोटे-छोटे अस्थायी दानपात्र रखे जाएंगे। जिन्हें भरने के बाद निकाल लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बारे में पुरातत्व विभाग से चर्चा हो चुकी है।
विज्ञापन
इनसेट...
ट्रस्ट ने मान ली हैं शर्तें : पुरातत्व विभाग
पुरातत्व विभाग के अधीक्षक टीएल मीणा ने बताया कि चौरासी परिसर के पांच मंदिर विभाग के अधीन हैं। इन मंदिरों में दानपात्र स्थापित करने के संबंध में प्रशासन को शर्तें बताई गई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। ट्रस्ट दानपात्र को जमीन पर स्थापित करेगा।
विज्ञापन
चौरासी परिसर में पुरातत्व विभाग के माध्यम से स्थापित किए गए सभी दानपात्रों को जमीन पर रखने की बात पुरातत्व विभाग ने मणिमहेश ट्रस्ट के समक्ष रखी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इस कड़ी में शुक्रवार को ट्रस्ट के अध्यक्ष एडीएम भरमौर विनय धीमान और पुरातत्व विभाग के अधीक्षक टीएल मीणा ने चौरासी परिसर का मुआयना किया। गौरतलब है कि चौरासी परिसर में मणिमहेश मंदिर, लखना माता मंदिर, गणेश मंदिर, नरसिंह भगवान मंदिर और नंदी मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन आते हैं। इन मंदिरों में कोई भी बदलाव पुरातत्व विभाग की इजाजत के बिना नहीं किया जा सकता है। पिछले साल ट्रस्ट ने चौरासी परिसर में दानपात्र स्थापित किए थे ताकि मणिमहेश यात्रा के दौरान ट्रस्ट को आय हो सके, लेकिन इन दानपात्रों का आकार बड़ा होने की वजह से इन्हें स्थापित करने को लेकर मंदिर पुजारियों और ट्रस्ट के बीच विरोध उत्पन्न हो गया था, लेकिन इस बार ट्रस्ट ने इन दानपात्रों को स्थायी तौर पर स्थापित करने की मुहिम छेड़ी है, जबकि मंदिर के गर्भगृह में छोटे दानपात्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए पुरातत्व विभाग के साथ ट्रस्ट के अध्यक्ष एडीएम भरमौर की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन भी किया गया है। इस मौके पर टीएल मीणा, सर्वेयर अशोक कौंडल सहित अन्य उपस्थित थे।
विज्ञापन
जमीन पर लगाएंगे दानपात्र : एडीएम
एडीएम भरमौर विनय धीमान ने बताया कि मंदिर के बाहर सभी दानपात्र जमीन पर स्थापित होंगे। ताकि मंदिर की शोभा खराब न हो और गर्भगृह में छोटे-छोटे अस्थायी दानपात्र रखे जाएंगे। जिन्हें भरने के बाद निकाल लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बारे में पुरातत्व विभाग से चर्चा हो चुकी है।
विज्ञापन
इनसेट...
ट्रस्ट ने मान ली हैं शर्तें : पुरातत्व विभाग
पुरातत्व विभाग के अधीक्षक टीएल मीणा ने बताया कि चौरासी परिसर के पांच मंदिर विभाग के अधीन हैं। इन मंदिरों में दानपात्र स्थापित करने के संबंध में प्रशासन को शर्तें बताई गई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। ट्रस्ट दानपात्र को जमीन पर स्थापित करेगा।