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लक्ष्मीनारायण मंदिर में दो दिन से नहीं लगा भोग
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चंबा। लक्ष्मीनाथ मंदिर में दो दिन से भोग नहीं लगा। लोगों का दावा है कि 1,100 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए धूप खरीदने तक के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में प्रबुद्धजन ही दो दिन से अपने घरों से तीन समय का भोग तैयार कर भगवान को अर्पित कर रहे हैं।
दो माह से भगवान को लगने वाले भोग के लिए लाए गए राशन के बिलों की अदायगी न होने से ऐसी नौबत आई है। इससे लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। प्रबुद्धजनों का कहना है कि पूर्व कमेटी के कार्यकाल में इस प्रकार की समस्या कभी उत्पन्न नहीं हुई। वहीं प्रशासनिक अधिकारी की मानें तो लक्ष्मीनारायण मंदिर में प्रति माह भोग के रूप में 30 से 40 हजार रुपये राशन का बिल बन रहा है जो समझ से ही परे है। कहा कि जल्द बिलों की अदायगी कर दी जाएगी।
मंदिर के पुजारी शांतिदत्त शर्मा ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में वह कुठारी के पद पर 60 साल से विद्यमान रहे। मंदिर अधिकारी की व्यवस्था से दुखी होकर 13 जुलाई को अपने पद से त्यागपत्र दिया जिसे 16 जुलाई को स्वीकार किया गया। कहा कि मंदिर कमेटी में उनके नाम का जिक्र तक नहीं किया गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी ने उन्हें एक बार भी त्यागपत्र देने को लेकर नहीं पूछा। कहा कि मंदिर को लेकर बनाए गए ट्रस्ट को निरस्त करना चाहिए। ब्राह्मण सभा के मुख्य सलाहकार विनय कुमार शर्मा ने कहा कि मंदिर अधिकारी पहले बाबा बालक नाथ मंदिर में तैनात थे। बिना पूर्व सूचना के वह मंदिर में निरीक्षण करते हैं। तीन वर्ष बाद उन्होंने दानपत्र खोले जिसमें महज दो लाख के करीब धनराशि निकली। इससे पता चलता है कि मंदिर की आय अधिक नहीं है। मंदिर के भोग के लिए प्रतिदिन 1,200 से 1,400 रुपये लगते हैं लेकिन मंदिर अधिकारी अपनी मनमानी करने में ही लगे हुए हैं। कहा कि जिस प्रकार मंडी, कुल्लू और हमीरपुर में गठित किए गए ट्रस्ट की अधिसूचना को निरस्त किया गया है, उसी तर्ज पर यहां भी ट्रस्ट निरस्त होना चाहिए। मंगलेश शर्मा ने बताया कि मंदिर अधिकारी के दुर्व्यवहार के कारण कुठारी ने अपना पद छोड़ा। दिनेश शर्मा ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में अव्यवस्था का आलम बन चुका है। उन्होंने लक्ष्मीनारायण ट्रस्ट को लेकर विस्तार से चर्चा कर ट्रस्ट निरस्त करने की बात कही है।
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मंदिर अधिकारी तहसीलदार चंबा सुभाष कुमार ठाकुर ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में प्रति माह भोग के रूप में 30 से 40 हजार रुपये राशन का बिल बन रहा है जो समझ से ही परे है। कहा कि जल्द बिलों की अदायगी कर दी जाएगी।
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दो माह से भगवान को लगने वाले भोग के लिए लाए गए राशन के बिलों की अदायगी न होने से ऐसी नौबत आई है। इससे लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। प्रबुद्धजनों का कहना है कि पूर्व कमेटी के कार्यकाल में इस प्रकार की समस्या कभी उत्पन्न नहीं हुई। वहीं प्रशासनिक अधिकारी की मानें तो लक्ष्मीनारायण मंदिर में प्रति माह भोग के रूप में 30 से 40 हजार रुपये राशन का बिल बन रहा है जो समझ से ही परे है। कहा कि जल्द बिलों की अदायगी कर दी जाएगी।
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मंदिर के पुजारी शांतिदत्त शर्मा ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में वह कुठारी के पद पर 60 साल से विद्यमान रहे। मंदिर अधिकारी की व्यवस्था से दुखी होकर 13 जुलाई को अपने पद से त्यागपत्र दिया जिसे 16 जुलाई को स्वीकार किया गया। कहा कि मंदिर कमेटी में उनके नाम का जिक्र तक नहीं किया गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी ने उन्हें एक बार भी त्यागपत्र देने को लेकर नहीं पूछा। कहा कि मंदिर को लेकर बनाए गए ट्रस्ट को निरस्त करना चाहिए। ब्राह्मण सभा के मुख्य सलाहकार विनय कुमार शर्मा ने कहा कि मंदिर अधिकारी पहले बाबा बालक नाथ मंदिर में तैनात थे। बिना पूर्व सूचना के वह मंदिर में निरीक्षण करते हैं। तीन वर्ष बाद उन्होंने दानपत्र खोले जिसमें महज दो लाख के करीब धनराशि निकली। इससे पता चलता है कि मंदिर की आय अधिक नहीं है। मंदिर के भोग के लिए प्रतिदिन 1,200 से 1,400 रुपये लगते हैं लेकिन मंदिर अधिकारी अपनी मनमानी करने में ही लगे हुए हैं। कहा कि जिस प्रकार मंडी, कुल्लू और हमीरपुर में गठित किए गए ट्रस्ट की अधिसूचना को निरस्त किया गया है, उसी तर्ज पर यहां भी ट्रस्ट निरस्त होना चाहिए। मंगलेश शर्मा ने बताया कि मंदिर अधिकारी के दुर्व्यवहार के कारण कुठारी ने अपना पद छोड़ा। दिनेश शर्मा ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में अव्यवस्था का आलम बन चुका है। उन्होंने लक्ष्मीनारायण ट्रस्ट को लेकर विस्तार से चर्चा कर ट्रस्ट निरस्त करने की बात कही है।
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मंदिर अधिकारी तहसीलदार चंबा सुभाष कुमार ठाकुर ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर में प्रति माह भोग के रूप में 30 से 40 हजार रुपये राशन का बिल बन रहा है जो समझ से ही परे है। कहा कि जल्द बिलों की अदायगी कर दी जाएगी।