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Chamba News: जम्मू के श्रद्धालुओं के लौटते ही मिंधल यात्रा का समापन
Fri, 14 Jun 2024 10:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 14 Jun 2024 10:12 PM IST
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चंबा में पांगी के मिंधल माता छड़ी यात्रा के बाद सफाई करती महिला मंडल के स्वंयसेवी।स्त्रोत जागरू
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पांगी (चंबा)। मिंधल माता मंदिर में माथा टेकने के बाद जम्मू जिले के क्यूनग्रां गांव से श्रद्धालुओं के लौटते ही शुक्रवार को ऐतिहासिक मिंधल यात्रा का समापन हो गया।
ये श्रद्धालु बड़ी छड़ी में शामिल होकर माता का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे थे। 21 मई से 14 जून तक मिंधल माता की यात्रा के दौरान पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर समेत आसपास के गांवों से करीब छह हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका।
जम्मू के क्यूनग्रां गांव से बड़ी छड़ी लेकर पहुंचे मिंधल माता के गूर तीर्थ राम ने बताया कि वह 45 वर्षो से अकेले ही माता के दरबार में आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2007 में माता ने रात स्वप्न में दर्शन देकर छड़ी लेकर यात्रा पर आने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने परिजनों समेत गांव के लोगों को स्वप्न के बारे में बताया। तब से लेकर बड़ी छड़ी के रूप में माता दर्शन करने आ रहे हैं। हर वर्ष मिंधल माता के दरबार में छड़ी यात्रा लेकर आते हैं। यात्रा में जम्मू के श्रद्धालुओं की तादाद अधिक होती है। मंदिर में जम्मू के विभिन्न जिलों से तीन छड़ियां पहुंचती हैं।
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इस बार मिंधल माता की यात्रा 21 मई से शुरू हुई। इसके लिए पांगी प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली थीं। पुलिस, जलशक्ति, लोक निर्माण विभाग और बीआरओ की टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के आदेश थे। जम्मू के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं की टोलियां गाड़ियों में सवार होकर माता के दर पहुंचीं। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, हवन और जागरण का दौर जारी रहा।
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पहली बार कांगड़ा से पहुंची छड़ी
जनजातीय क्षेत्र पांगी के ऐतिहासिक मिंधल माता की यात्रा में पहली बार हिमाचल के कांगड़ा जिले से भी छड़ी पहुंची। कांगड़ा जिले में स्थित चंडी माता दरबार कांगड़ा से अंकुश गुप्ता छड़ी लेकर मिंधल मंदिर में पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना और माता के दर पर शीश नवाजने के बाद वे वापस लौटे।
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ये श्रद्धालु बड़ी छड़ी में शामिल होकर माता का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे थे। 21 मई से 14 जून तक मिंधल माता की यात्रा के दौरान पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर समेत आसपास के गांवों से करीब छह हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका।
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जम्मू के क्यूनग्रां गांव से बड़ी छड़ी लेकर पहुंचे मिंधल माता के गूर तीर्थ राम ने बताया कि वह 45 वर्षो से अकेले ही माता के दरबार में आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2007 में माता ने रात स्वप्न में दर्शन देकर छड़ी लेकर यात्रा पर आने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने परिजनों समेत गांव के लोगों को स्वप्न के बारे में बताया। तब से लेकर बड़ी छड़ी के रूप में माता दर्शन करने आ रहे हैं। हर वर्ष मिंधल माता के दरबार में छड़ी यात्रा लेकर आते हैं। यात्रा में जम्मू के श्रद्धालुओं की तादाद अधिक होती है। मंदिर में जम्मू के विभिन्न जिलों से तीन छड़ियां पहुंचती हैं।
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इस बार मिंधल माता की यात्रा 21 मई से शुरू हुई। इसके लिए पांगी प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली थीं। पुलिस, जलशक्ति, लोक निर्माण विभाग और बीआरओ की टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के आदेश थे। जम्मू के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं की टोलियां गाड़ियों में सवार होकर माता के दर पहुंचीं। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, हवन और जागरण का दौर जारी रहा।
पहली बार कांगड़ा से पहुंची छड़ी
जनजातीय क्षेत्र पांगी के ऐतिहासिक मिंधल माता की यात्रा में पहली बार हिमाचल के कांगड़ा जिले से भी छड़ी पहुंची। कांगड़ा जिले में स्थित चंडी माता दरबार कांगड़ा से अंकुश गुप्ता छड़ी लेकर मिंधल मंदिर में पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना और माता के दर पर शीश नवाजने के बाद वे वापस लौटे।