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मिड-डे मील वर्करों ने निकाली रोष रैली
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शहर में रोष रैली निकालते मिड डे मील वर्कर यूनियन के कर्मी।
- फोटो : Chamba
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चंबा। मिड-डे मील वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय में रोष रैली निकाली। उपायुक्त कार्यालय परिसर से मिड-डे मील वर्करों ने रोष रैली शुरू की, जो शहर के मुख्य बाजार से होकर म्यूजियम रोड और मेडिकल कॉलेज चंबा से होती हुई वापस उपायुक्त कार्यालय परिसर पहुंची। इस दौरान मिड-डे मील वर्करों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मिड-डे मील वर्कर यूनियन (संबंधित सीटू) के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त डीसी राणा के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम को अपना मांग पत्र भेजा।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिला सचिव सुदेश ने कहा कि मिड-डे मील वर्करों का प्रदेशभर में शोषण हो रहा है। कहा कि न्यूनतम वेतन सरकार की ओर से लागू नहीं किया जा रहा है। सरकार की ओर से नौ हजार रुपये न्यूनतम वेतन तय किया गया है। मिड-डे मील वर्कर सरकार और शिक्षण संस्थानों में तैनात किए गए हैं लेकिन अभी तक सरकारी कर्मचारी नहीं बनाया गया है। मिड-डे मील वर्कर पिछले करीब बीस साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मिड-डे मील कर्मचारियों को 12 के बजाय दस महीने का ही वेतन दिया जा रहा है।
मांग की है कि 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाना चाहिए। क्योंकि किसी भी स्कूल में काम करने के लिए दो मिड-डे मील आवश्यक हैं। बेहद दुखद बात है कि मिड-डे मील वर्कर को मेडिकल और अकस्मात अवकाश का प्रावधान नहीं है। यूनियन की मांग है कि प्रत्येक स्कूल में दो मिड-डे मील वर्कर होने चाहिए। वहीं, हर माह नियमित रूप से वेतन की अदायगी की जाए। इस मौके पर जिला अध्यक्ष होशियार सिंह, जिला सचिव लेख राज, रिझू राम, नरेंद्र कुमार सहित मिड-डे मील वर्कर मौजूद रहे।
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प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिला सचिव सुदेश ने कहा कि मिड-डे मील वर्करों का प्रदेशभर में शोषण हो रहा है। कहा कि न्यूनतम वेतन सरकार की ओर से लागू नहीं किया जा रहा है। सरकार की ओर से नौ हजार रुपये न्यूनतम वेतन तय किया गया है। मिड-डे मील वर्कर सरकार और शिक्षण संस्थानों में तैनात किए गए हैं लेकिन अभी तक सरकारी कर्मचारी नहीं बनाया गया है। मिड-डे मील वर्कर पिछले करीब बीस साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मिड-डे मील कर्मचारियों को 12 के बजाय दस महीने का ही वेतन दिया जा रहा है।
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मांग की है कि 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाना चाहिए। क्योंकि किसी भी स्कूल में काम करने के लिए दो मिड-डे मील आवश्यक हैं। बेहद दुखद बात है कि मिड-डे मील वर्कर को मेडिकल और अकस्मात अवकाश का प्रावधान नहीं है। यूनियन की मांग है कि प्रत्येक स्कूल में दो मिड-डे मील वर्कर होने चाहिए। वहीं, हर माह नियमित रूप से वेतन की अदायगी की जाए। इस मौके पर जिला अध्यक्ष होशियार सिंह, जिला सचिव लेख राज, रिझू राम, नरेंद्र कुमार सहित मिड-डे मील वर्कर मौजूद रहे।
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