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Chamba News: 25 बच्चों की शर्त थोप स्कूलों से निकाले जा रहे मिड-डे मील वर्कर
Sat, 10 Feb 2024 10:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 10 Feb 2024 10:22 PM IST
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चंबा के सलूणी में बैठक के दौरान मौजूद मिड डे मील वर्कर।संवाद
सलूणी (चंबा)। मिड-डे मील वर्कर यूनियन की बैठक सलूणी में जिला अध्यक्ष जगदीश की अध्यक्षता में हुई। बैठक में 16 फरवरी को होने वाली देशव्यापी हड़ताल के बारे में चर्चा की गई।
जिला अध्यक्ष जगदीश ने बताया कि अभी पूरे जिले में बैठकों का दौर चला है। 16 फरवरी को होने वाली हड़ताल के बारे में चर्चा और प्रचार हो रहा है। मिड-डे मील वर्कर कई वर्षों से शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकारें इनके मुद्दे को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। केंद्र सरकार लगातार बजट में कटौती कर रही है। देश कई जगह पर मिड-डे मील को एनजीओ और प्राइवेट कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। आज मिड-डे मील वर्करों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया है। इन पर 25 बच्चों की शर्त थोप दी गई है। 15 वर्षों से काम करने वाले व्यक्ति को भी निकाला जा रहा है।
केवल मिड-डे मील वर्कर ही देश का ऐसा तबका है, जो केवल 10 महीने का मानदेय ले रहा है। हिमाचल हाईकोर्ट ने निर्णय दिया था कि मिड-डे मील वर्कर को 12 महीने का मानदेय मिलना चाहिए। इस निर्णय को लागू नहीं किया जा रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद कोई भी सामाजिक सुरक्षा नहीं है। यूनियन ने न्यूनतम वेतन देने की मांग की है। 4,000 रुपये में परिवार को पालना मुश्किल है। श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुसार 26,000 रुपये प्रति माह जरूरी हैं। छुट्टियों का कोई प्रावधान नहीं है। ग्रैच्युटी का कोई लाभ नहीं मिलता है।
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सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि मिड-डे मील वर्कर यूनियन ने पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया है। बैठक में जगदीश, नेहा, कौशल्या, व्यासदेव, माया , पानो, माला देवी, अंजू देवी, भावना, इच्छो देवी, चीनो देवी, नीलम, महेंद्र, बालो, पुष्पा, चंबी देवी आदि मौजूद रहे।
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जिला अध्यक्ष जगदीश ने बताया कि अभी पूरे जिले में बैठकों का दौर चला है। 16 फरवरी को होने वाली हड़ताल के बारे में चर्चा और प्रचार हो रहा है। मिड-डे मील वर्कर कई वर्षों से शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकारें इनके मुद्दे को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। केंद्र सरकार लगातार बजट में कटौती कर रही है। देश कई जगह पर मिड-डे मील को एनजीओ और प्राइवेट कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। आज मिड-डे मील वर्करों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया है। इन पर 25 बच्चों की शर्त थोप दी गई है। 15 वर्षों से काम करने वाले व्यक्ति को भी निकाला जा रहा है।
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केवल मिड-डे मील वर्कर ही देश का ऐसा तबका है, जो केवल 10 महीने का मानदेय ले रहा है। हिमाचल हाईकोर्ट ने निर्णय दिया था कि मिड-डे मील वर्कर को 12 महीने का मानदेय मिलना चाहिए। इस निर्णय को लागू नहीं किया जा रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद कोई भी सामाजिक सुरक्षा नहीं है। यूनियन ने न्यूनतम वेतन देने की मांग की है। 4,000 रुपये में परिवार को पालना मुश्किल है। श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुसार 26,000 रुपये प्रति माह जरूरी हैं। छुट्टियों का कोई प्रावधान नहीं है। ग्रैच्युटी का कोई लाभ नहीं मिलता है।
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सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि मिड-डे मील वर्कर यूनियन ने पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया है। बैठक में जगदीश, नेहा, कौशल्या, व्यासदेव, माया , पानो, माला देवी, अंजू देवी, भावना, इच्छो देवी, चीनो देवी, नीलम, महेंद्र, बालो, पुष्पा, चंबी देवी आदि मौजूद रहे।