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Chamba News: अस्पतालों में थैलेसीमिया की दवाई खत्म, भटक रहे मरीज
Wed, 18 Jan 2023 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 18 Jan 2023 11:13 PM IST
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थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून में आयरन का संतुलन बनाने को भी खानी पड़ती है दवाई
प्रवीण कुमार
चंबा। मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया की दवाई का स्टाक खत्म हो चुका है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह कि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए अभिभावकों को माह में 2400 रुपये की दवाई चंडीगढ़ से मंगवानी पड़ रही है। दस गोलियों की कीमत 400 रुपये है जो पांच दिन में खानी पड़ती हैं। मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी सहित जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में बीमार बच्चों को यह दवाई नहीं मिल रही है। इस दवाई को लेने के लिए अभिभावक जब भी डिस्पेंसरी या सरकारी अस्पताल में पहुंचते हैं तो उन्हें वहां से बैरंग लौटा दिया जाता है।
इतना ही नहीं उन्हें चंबा के निजी केमिस्ट की दुकान में भी यह दवाई उपलब्ध नहीं हो पा रही है। थैलेसीमिया से पीड़ित गंभीर बच्चों को जहां समय-समय पर खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है तो वहीं खून में आयरन की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए भी यही दवाई खानी पड़ती है। बाल रोग विशेषज्ञ बच्चों को इलाज के लिए पर्ची पर भले ही इस दवाई को खाने का परामर्श दे देते हैं लेकिन यह दवाई कहां से उपलब्ध होगी इसके बारे में अभिभावकों को कोई सुविधा नहीं दी जाती। मजबूरन अभिभावक अपने बच्चों का इलाज करवाने के लिए चंडीगढ़ से दवाई मंगवा रहे हैं। जिले में मौजूदा समय में 30 से 35 बच्चे थैलेसीमिया रोग से पीड़ित हैं।
मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की दवाई उपलब्ध करवाने को जरूरी कदम उठाए जाएंगे। जिले के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा।
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प्रवीण कुमार
चंबा। मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया की दवाई का स्टाक खत्म हो चुका है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह कि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए अभिभावकों को माह में 2400 रुपये की दवाई चंडीगढ़ से मंगवानी पड़ रही है। दस गोलियों की कीमत 400 रुपये है जो पांच दिन में खानी पड़ती हैं। मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी सहित जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में बीमार बच्चों को यह दवाई नहीं मिल रही है। इस दवाई को लेने के लिए अभिभावक जब भी डिस्पेंसरी या सरकारी अस्पताल में पहुंचते हैं तो उन्हें वहां से बैरंग लौटा दिया जाता है।
इतना ही नहीं उन्हें चंबा के निजी केमिस्ट की दुकान में भी यह दवाई उपलब्ध नहीं हो पा रही है। थैलेसीमिया से पीड़ित गंभीर बच्चों को जहां समय-समय पर खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है तो वहीं खून में आयरन की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए भी यही दवाई खानी पड़ती है। बाल रोग विशेषज्ञ बच्चों को इलाज के लिए पर्ची पर भले ही इस दवाई को खाने का परामर्श दे देते हैं लेकिन यह दवाई कहां से उपलब्ध होगी इसके बारे में अभिभावकों को कोई सुविधा नहीं दी जाती। मजबूरन अभिभावक अपने बच्चों का इलाज करवाने के लिए चंडीगढ़ से दवाई मंगवा रहे हैं। जिले में मौजूदा समय में 30 से 35 बच्चे थैलेसीमिया रोग से पीड़ित हैं।
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मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की दवाई उपलब्ध करवाने को जरूरी कदम उठाए जाएंगे। जिले के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा।
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