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5000 कैंसर रोगियों को अपने ईलाज के लिए भटकना पड़ रहा दर बदर
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चंबा। जिले के 5,000 कैंसर रोगियों का इलाज छह माह से राम भरोसे है। अस्पताल की कैंसर ओपीडी पर ताला लटका है, जिसे देख कैंसर मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। इन मरीजों को इलाज करवाने के लिए टांडा और आईजीएमसी शिमला की दौड़ लगानी पड़ रही है।
चंबा मेडिकल कॉलेज में तैनात तीन कैंसर रोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ कर यहां से जा चुके हैं। उनके जाने के बाद सरकार ने यहां अतिरिक्त विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कई बार सरकार से यहां कैंसर रोग विशेषज्ञ तैनात करने की मांग कर चुका है। ओपीडी खुलने से मरीजों को अपने इलाज को लेकर सुविधा मिल रही थी, लेकिन अब उन्हें जिले से बाहर जाना पड़ रहा है। गरीब मरीज जिले के बाहर जाने में असमर्थ होने के कारण मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ आने का इंतजार कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में तीन विशेषज्ञ तैनात थे। इनमें से एक विशेषज्ञ ने छह माह पहले नौकरी छोड़ने के लिए प्रबंधन को रिजाइन दे दिया था, जबकि एक महिला विशेषज्ञ मेटरनिटी लीव पर हैं। वे कब लौटेंगी, इसके बारे में प्रबंधन को भी जानकारी नहीं है। तीसरे विशेषज्ञ का कैंसर में सुपर स्पेशिलिटी कोर्स के लिए चयन हो गया है। इसलिए वे भी चंबा से जा चुके हैं।
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अब आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज की कैंसर ओपीडी जहां इन विशेषज्ञों के जाने से बंद हो गई है, तो वहीं कीमोथैरेपी सुविधा भी बंद है। इसके चलते कैंसर रोगियों को अब अपना इलाज करवाने के लिए जिला के बाहर जाना पड़ रहा है। जिले में 5000 कैंसर रोगियों में महिलाओं के मुकाबले पुरुष मरीजों की संख्या आठ प्रतिशत अधिक है। ये रोगी मुंह, गले सहित अन्य कैंसर रोगों से पीड़ित हैं।
अस्पताल में हर रोज आते हैं कैंसर के 10 से 15 मरीज
पिछले वर्ष मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 571 कैंसर रोगी इलाज करवाने के लिए पहुंचे थे। इन मरीजों को कीमोथैरेपी सहित अन्य उपचार दिया जा रहा था। इसके अलावा रोजाना कैंसर ओपीडी में 10 से 15 कैंसर रोगी इलाज के लिए पहुंचते थे, लेकिन ओपीडी बंद होने के बाद इन मरीजों को दर बदर भटकना पड़ रहा है।
जल्द हो सकती है विशेषज्ञों की नियुक्ति
कार्यकारी प्राचार्य डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि कैंसर विभाग में चल रही डॉक्टरों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवा दिया गया है। जल्द सरकार यहां कैंसर विशेषज्ञों की नियुक्ति कर सकती है। हाल ही में सरकार ने 19 सीनियर रेजिडेंटर चिकित्सकों की तैनाती के ऑर्डर चंबा के लिए निकाले हैं।
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चंबा मेडिकल कॉलेज में तैनात तीन कैंसर रोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ कर यहां से जा चुके हैं। उनके जाने के बाद सरकार ने यहां अतिरिक्त विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कई बार सरकार से यहां कैंसर रोग विशेषज्ञ तैनात करने की मांग कर चुका है। ओपीडी खुलने से मरीजों को अपने इलाज को लेकर सुविधा मिल रही थी, लेकिन अब उन्हें जिले से बाहर जाना पड़ रहा है। गरीब मरीज जिले के बाहर जाने में असमर्थ होने के कारण मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ आने का इंतजार कर रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में तीन विशेषज्ञ तैनात थे। इनमें से एक विशेषज्ञ ने छह माह पहले नौकरी छोड़ने के लिए प्रबंधन को रिजाइन दे दिया था, जबकि एक महिला विशेषज्ञ मेटरनिटी लीव पर हैं। वे कब लौटेंगी, इसके बारे में प्रबंधन को भी जानकारी नहीं है। तीसरे विशेषज्ञ का कैंसर में सुपर स्पेशिलिटी कोर्स के लिए चयन हो गया है। इसलिए वे भी चंबा से जा चुके हैं।
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अब आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज की कैंसर ओपीडी जहां इन विशेषज्ञों के जाने से बंद हो गई है, तो वहीं कीमोथैरेपी सुविधा भी बंद है। इसके चलते कैंसर रोगियों को अब अपना इलाज करवाने के लिए जिला के बाहर जाना पड़ रहा है। जिले में 5000 कैंसर रोगियों में महिलाओं के मुकाबले पुरुष मरीजों की संख्या आठ प्रतिशत अधिक है। ये रोगी मुंह, गले सहित अन्य कैंसर रोगों से पीड़ित हैं।
अस्पताल में हर रोज आते हैं कैंसर के 10 से 15 मरीज
पिछले वर्ष मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 571 कैंसर रोगी इलाज करवाने के लिए पहुंचे थे। इन मरीजों को कीमोथैरेपी सहित अन्य उपचार दिया जा रहा था। इसके अलावा रोजाना कैंसर ओपीडी में 10 से 15 कैंसर रोगी इलाज के लिए पहुंचते थे, लेकिन ओपीडी बंद होने के बाद इन मरीजों को दर बदर भटकना पड़ रहा है।
जल्द हो सकती है विशेषज्ञों की नियुक्ति
कार्यकारी प्राचार्य डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि कैंसर विभाग में चल रही डॉक्टरों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवा दिया गया है। जल्द सरकार यहां कैंसर विशेषज्ञों की नियुक्ति कर सकती है। हाल ही में सरकार ने 19 सीनियर रेजिडेंटर चिकित्सकों की तैनाती के ऑर्डर चंबा के लिए निकाले हैं।