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आंखों के सामने राख हो गई जिंदगी भर की कमाई
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पांगी की थांदल गांव में अग्नकिंड के बाद राख में से सामान तलाशते प्रभावित ग्रामीण।
- फोटो : Chamba
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पांगी (चंबा)। खून पसीने की कमाई से बनाए आशियाने को अपनी आंखों के सामने जलता देखकर ऊधो राम की पत्नी कमला देवी गश खाकर गिर पड़ीं। वहीं बेटी शिल्पा और बेटे रावल के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
अग्निकांड के समय प्रभावित ऊधो राम समझ नहीं पा रहा था कि वह अपने आशियाने को जलने से बचाए या सुधबुध खो बैठीं पत्नी को संभाले या बच्चों को ढांढस बंधवाए। जैसे-तैसे कर उन्होंने अपनी पत्नी को उठाकर पड़ोस के घर पहुंचाया और बेटे-बेटी को अपनी मां का ध्यान रखने की बात कहकर वापस मकान में लगी आग को बुझाने में जुट गया। तब तक प्रचंड हो चुकी आग की लपटों को रोकने के लिए ग्रामीणों ने भी मोर्चा संभाल लिया था।
काफी देर तक जद्दोजहद के बावजूद आग की लपटें काबू नहीं हो सकीं। गांव में पानी भी अब खत्म हो चुका था। ग्रामीणों ने थांदल गांव की कूहल से भी पानी ढोकर आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग शांत नहीं हुई। भीषण अग्निकांड ऊधो राम, हेमराज, कांशी राम और खेमराज को ताउम्र न भूलने वाले जख्म दे ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि गांव में बड़ी क्षमता का कोई जल भंडारण टैंक होता तो शायद उनके आशियाने आग की भेंट न चढ़ते।
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अग्निकांड के समय प्रभावित ऊधो राम समझ नहीं पा रहा था कि वह अपने आशियाने को जलने से बचाए या सुधबुध खो बैठीं पत्नी को संभाले या बच्चों को ढांढस बंधवाए। जैसे-तैसे कर उन्होंने अपनी पत्नी को उठाकर पड़ोस के घर पहुंचाया और बेटे-बेटी को अपनी मां का ध्यान रखने की बात कहकर वापस मकान में लगी आग को बुझाने में जुट गया। तब तक प्रचंड हो चुकी आग की लपटों को रोकने के लिए ग्रामीणों ने भी मोर्चा संभाल लिया था।
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काफी देर तक जद्दोजहद के बावजूद आग की लपटें काबू नहीं हो सकीं। गांव में पानी भी अब खत्म हो चुका था। ग्रामीणों ने थांदल गांव की कूहल से भी पानी ढोकर आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग शांत नहीं हुई। भीषण अग्निकांड ऊधो राम, हेमराज, कांशी राम और खेमराज को ताउम्र न भूलने वाले जख्म दे ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि गांव में बड़ी क्षमता का कोई जल भंडारण टैंक होता तो शायद उनके आशियाने आग की भेंट न चढ़ते।
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