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आपातकालीन कक्ष की दीवारों में रिसाव, मरीज परेशान
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष की दीवारों में हो रहा पानी का रिसाव मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। पानी का यह रिसाव छाती सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
दीवारों पर सीलन होने से रंग रोगन भी उखड़ रहा है। गर्मियों में मरीजों को इससे ज्यादा परेशानी नहीं होती लेकिन सर्दियों के मौसम में सीलन होने से ठंड अधिक हो जाती है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
मेडिकल कॉलेज में जिले की पौने छह लाख की आबादी इलाज करवाने के लिए निर्भर है। ऐसे में जब भी किसी गंभीर मरीज को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया जाता है तो सबसे पहले उसे आपातकालीन कक्ष में रखा जाता है। यहां पर उसे प्रारंभिक उपचार दिया जाता है। मरीज की हालत स्थिर होने पर उसे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। इसके चलते आपातकालीन कक्ष में 24 घंटे सेवाएं सुचारु रहती हैं। एक या दो चिकित्सक 24 घंटे मरीजों की सुविधा के लिए यहां तैनात रहते हैं। इसलिए प्रबंधन को मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तुरंत पानी के रिसाव की समस्या का समाधान करना चाहिए।
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तीमारदारों अशोक कुमार, चंद राम, राकेश कुमार, धर्मपाल, किशोर और पवन कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष की दीवारों में पानी का रिसाव होने से जहां मरीज परेेशान हो रहे हैं तो वहीं डिजिटल एक्सरे रूम में भी ताला लटका रहता है। इसकी वजह से आपातकालीन वाले मरीजों को भी एक्सरे के लिए सामान्य एक्सरे रूम में लाइनों में खड़े होना पड़ता है। उन्होंने प्रबंधन से मांग की है कि आपातकालीन कक्ष में दीवारों में हो रही सीलन को दूर किया जाए।
प्राचार्य डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि आपातकालीन कक्ष की सेवाओं में पहले से सुधार किया गया है। दीवारों में हो रहे पानी के रिसाव को भी जल्द दुरुस्त करवाया जाएगा।
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दीवारों पर सीलन होने से रंग रोगन भी उखड़ रहा है। गर्मियों में मरीजों को इससे ज्यादा परेशानी नहीं होती लेकिन सर्दियों के मौसम में सीलन होने से ठंड अधिक हो जाती है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
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मेडिकल कॉलेज में जिले की पौने छह लाख की आबादी इलाज करवाने के लिए निर्भर है। ऐसे में जब भी किसी गंभीर मरीज को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया जाता है तो सबसे पहले उसे आपातकालीन कक्ष में रखा जाता है। यहां पर उसे प्रारंभिक उपचार दिया जाता है। मरीज की हालत स्थिर होने पर उसे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। इसके चलते आपातकालीन कक्ष में 24 घंटे सेवाएं सुचारु रहती हैं। एक या दो चिकित्सक 24 घंटे मरीजों की सुविधा के लिए यहां तैनात रहते हैं। इसलिए प्रबंधन को मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तुरंत पानी के रिसाव की समस्या का समाधान करना चाहिए।
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तीमारदारों अशोक कुमार, चंद राम, राकेश कुमार, धर्मपाल, किशोर और पवन कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष की दीवारों में पानी का रिसाव होने से जहां मरीज परेेशान हो रहे हैं तो वहीं डिजिटल एक्सरे रूम में भी ताला लटका रहता है। इसकी वजह से आपातकालीन वाले मरीजों को भी एक्सरे के लिए सामान्य एक्सरे रूम में लाइनों में खड़े होना पड़ता है। उन्होंने प्रबंधन से मांग की है कि आपातकालीन कक्ष में दीवारों में हो रही सीलन को दूर किया जाए।
प्राचार्य डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि आपातकालीन कक्ष की सेवाओं में पहले से सुधार किया गया है। दीवारों में हो रहे पानी के रिसाव को भी जल्द दुरुस्त करवाया जाएगा।