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भरमौर में अल्ट्रासाउंड ना होने से दंपत्ति को गंवानी पड़ी जान
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भरमौर (चंबा)। सिविल अस्पताल भरमौर में अल्ट्रासाउंड सुविधा होती तो शायद ढकोग में सड़क हादसा न होता। भरमौर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने की वजह से पवन कुमार अपनी पत्नी अनीता देवी को अल्ट्रासाउंड के लिए चंबा मुख्यालय लाया था।
शाम को जब चंबा में पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाकर भरमौर की तरफ वापस लौट रहे थे तो ढकोग के पास उनकी कार पर अचानक पहाड़ी से एक गाय गिरी गई, जिससे चालक का गाड़ी से नियंत्रण बिगड़ा और कार सीधे रावी में जा गिरी।
स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से पवन कुमार का शव नदी से निकाल लिया है जबकि, अनीता देवी अभी तक लापता है। उसे तलाश करने के लिए पुलिस की ओर से सर्च अभियान चलाया गया है।
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हादसे में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। परिवार जहां अनीता की कोक में पल रहे बच्चे की दुनिया में आने की खुशियां मना रहा था वहीं, यह खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। सिविल अस्पताल भरमौर में अगर अल्ट्रासाउंड सुविधा होती तो अनीता अपने अल्ट्रासाउंड के लिए चंबा नहीं जाती। ऐसा नहीं है कि सिविल अस्पताल भरमौर में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। सरकार ने लाखों की मशीन अस्पताल में लगा रखी है लेकिन, मशीन को चलाने के लिए वहां रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं किया है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
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शाम को जब चंबा में पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाकर भरमौर की तरफ वापस लौट रहे थे तो ढकोग के पास उनकी कार पर अचानक पहाड़ी से एक गाय गिरी गई, जिससे चालक का गाड़ी से नियंत्रण बिगड़ा और कार सीधे रावी में जा गिरी।
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स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से पवन कुमार का शव नदी से निकाल लिया है जबकि, अनीता देवी अभी तक लापता है। उसे तलाश करने के लिए पुलिस की ओर से सर्च अभियान चलाया गया है।
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हादसे में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। परिवार जहां अनीता की कोक में पल रहे बच्चे की दुनिया में आने की खुशियां मना रहा था वहीं, यह खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। सिविल अस्पताल भरमौर में अगर अल्ट्रासाउंड सुविधा होती तो अनीता अपने अल्ट्रासाउंड के लिए चंबा नहीं जाती। ऐसा नहीं है कि सिविल अस्पताल भरमौर में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। सरकार ने लाखों की मशीन अस्पताल में लगा रखी है लेकिन, मशीन को चलाने के लिए वहां रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं किया है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।