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Chamba News: अंग्रेजों से लोहा लेकर गर्व का अध्याय बन गए गुरदित्ता मल
Thu, 14 Aug 2025 10:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 14 Aug 2025 10:25 PM IST
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गुरदित्ता मल।संवादस्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा वाली खबर के साथ
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चंबा। भारत के स्वतंत्रता संग्राम की गाथा उन गुमनाम नायकों के बिना अधूरी है, जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया। ऐसे ही वीरों में गुरदित्ता मल पुत्र माधोराम निवासी मोहल्ला बनगोटू, चंबा का नाम सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। अंग्रेजों से लोहा लेकर वह हमेशा के लिए गर्व का अध्याय बन गए। 29 जुलाई 1924 को जन्में गुरदित्ता मल युवावस्था में ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ हथियार उठाकर स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा दी। उनका यह साहसिक कदम उन्हें रंगून और जिगरकच्छ की जेलों तक ले गया, जहां उन्होंने आठ माह तक कठोर कारावास हंसते-हंसते भुगता। बाद में उन्हें मुल्तान जेल से रिहा किया गया।
उनके त्याग और योगदान को राष्ट्र ने भी गौरव के साथ स्वीकारा। 1972 में भारत सरकार ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया। वहीं, 9 अगस्त 2003 को राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय स्तर पर उनका अभिनंदन किया। 29 जून 2005 को गुरदित्ता मल इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी स्मृतियां और प्रेरणा आज भी अमर हैं। उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची देशभक्ति केवल रणभूमि तक सीमित नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों, संघर्ष और आत्मबलिदान में निहित है।
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उनके त्याग और योगदान को राष्ट्र ने भी गौरव के साथ स्वीकारा। 1972 में भारत सरकार ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया। वहीं, 9 अगस्त 2003 को राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय स्तर पर उनका अभिनंदन किया। 29 जून 2005 को गुरदित्ता मल इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी स्मृतियां और प्रेरणा आज भी अमर हैं। उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची देशभक्ति केवल रणभूमि तक सीमित नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों, संघर्ष और आत्मबलिदान में निहित है।
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